News By Sunil Verma
रांची : सीएमपीडीआई, रांची द्वारा संस्थान के ‘‘कोयल हाल’’ में 19 से 21 मई, 2026 तक तीन-दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला, क्वालिटी काउंसिल आफ इंडिया-नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फार एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (क्यूसीआई-एनएबीईटी) के सहयोग से इनवायरमेंटल इम्पैक्ट एसेसमेंट (ईआईए) सलाहकार संगठनों के लिए आयोजित किया गया है। इस कार्यशाला का उदे्श्य विशेषज्ञ तकनीकी सत्रों, संवादात्मक चर्चाओं और समूह गतिविधियों के माध्यम से पेशेवर ज्ञान को सुदृढ़ करना और ईआईए प्रक्रिया की गुणवत्ता में वृद्धि करना है। यह कार्यशाला खनन और खनिज क्षेत्र के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन के क्षेत्र में ज्ञान के आदान-प्रदान, मानकीकरण और पेशेवर विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करेगी।सीएमपीडीआई के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक चौधरी शिवराज सिंह, निदेशक (तकनीकी/ईएस) राजीव कुमार सिन्हा, कोल इंडिया के कार्यपालक निदेशक (गवेषण)आर0के0 सिंह, एनएबीईटी के संयुक्त निदेशक जगमिंदर कटारिया, एनएबीईटी-क्यूसीआई के सीईओ डा0 वरिंदर सिंह कंवर, सीपीसीबी के पूर्व निदेशक जतिंदर सिंह काम्योत्रा, वायु गुणवत्ता, पारिस्थितिकी, जोखिम मूल्यांकन, शोर और कम्पन तथा गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (क्यूएमएस) सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, सीएमपीडीआई के क्षेत्रीय संस्थानों और सीएमपीडीआई (मुख्यालय), रांची से ईआईए तैयार करने से जुड़े कर्मियों ने इस सत्र में शामिल हुए।इस अवसर पर चौधरी शिवराज सिंह ने अपने सम्बोधन में इस बात पर जोर दिया कि क्यूसीआई-एनएबीईटी के साथ जुड़ने से सीएमपीडीआई की तकनीकी क्षमताओं को और बल मिलेगा एवं कार्यप्रणालियों को मानकीकृत करने में मदद मिलेगी तथा हमारे वैज्ञानिक अध्ययनों की स्वीकार्यता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। साथ ही, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार/उत्तरदायी खनन के लिए सीएमपीडीआई की प्रतिबद्धता को भी बल मिलेगा। मौके पर राजीव कुमार सिन्हा ने उच्च गुणवत्ता वाले ईआईए के लिए सटीक आधारभूत डेटा तैयार करने के महत्व पर बल दिया। महाप्रबंधक (पर्यावरण) विनोद कुमार पांडे ने कार्यशाला का एजेंडा प्रस्तुत किया और रिपोर्ट तैयार करने में ईआईए अध्ययनों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।इस कार्यशाला में वायु गुणवत्ता प्रबंधन, पारिस्थितिकी और जैव विविधता, गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (क्यूएमएस), सामाजिक क्षेत्र के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन को सुदृढ़ बनाना, जोखिम और खतरे का आकलन, प्रभाव आकलन के लिए डेटा विश्लेषण, शोर और कम्पन अध्ययन, समूह गतिविधियां और प्रस्तुतियां जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।यह पहल पर्यावरणीय प्रभाव आकलन सलाहकारों की क्षमता निर्माण, पर्यावरणीय अध्ययनों में गुणवत्ता आश्वासन और बेहतर पर्यावरणीय प्रभाव आकलन पद्धतियों के माध्यम से पर्यावरणीय शासन को सुदृढ़ बनाने के प्रति सीएमपीडीआई की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
