श्री रामलला के दर्शन कर राष्ट्रपति मुर्मु ने द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना की
द्राैपदी मुर्मु ने श्रीराम जन्मभूमि की धूलि का स्पर्श करना बताया अपना परम सौभाग्य
Eksandeshlive Desk
अयोध्या : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि प्रभु श्रीराम ने जिस अयोध्या नगरी में जन्म लिया उसकी पवित्र धूलि का स्पर्श प्राप्त करना ही मैं अपना परम सौभाग्य मानती हूं। स्वयं प्रभु श्रीराम ने अपनी इस जन्मभूमि को स्वर्ग से भी श्रेष्ठ बताया था। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण, रामलला के दिव्य विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा और मंदिर के शिखर पर धर्म-ध्वजारोहण की तिथियां हमारे इतिहास और संस्कृति की स्वर्णिम तिथियां हैं। उन्हाेंने कहा कि रामराज्य के आदर्शाें के पालन से ही नैतिक और धर्माचरण आधारित राष्ट्र निर्माण हाे सकता है। राष्ट्रपति मुर्मु गुरुवार को अयाेध्या में प्रभु श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में “श्रीराम यंत्र” की स्थापना के बाद देश की जनता को संबोधित कर रहीं थीं। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि इसी अयोध्या यानी अवधपुरी और आस-पास की लोक-भाषा में संत कवि तुलसीदासजी ने ‘श्री रामचरितमानस’ की रचना की थी। रामचरितमानस में प्रभु श्रीराम सीताजी से कहते हैं कि यद्यपि सबने वैकुंठ का बखान किया है तथा वह वेद पुराणों में वर्णित है, जग-प्रसिद्ध है, लेकिन वैकुंठ भी मुझे अवधपुरी जितना प्रिय नहीं है।
प्रभु श्रीराम की कृपा से हमारा यह संकल्प सिद्ध हो : राष्ट्रपति ने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, संवत्सर 2083 के शुभारंभ के दिन और नवरात्र के प्रथम दिवस पर यहां आकर मैं स्वयं को कृतार्थ अनुभव कर रही हूं। मैं देश-विदेश में रहने वाले सभी भारतवासियों और रामभक्तों को नव वर्ष की आत्मिक बधाई देती हूं। नवरात्र के अंत में रामनवमी के दिन हम सब प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव मनाएंगे। मैं सभी को ‘नवमी तिथि, मधुमास पुनीता’ यानी रामनवमी के दिन मनाए जाने वाले पावन पर्व की अग्रिम बधाई देती हूं। मुर्मु ने कहा कि इस परम पवित्र स्थल पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का भूमिपूजन, रामलला के दिव्य विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार का भक्तजनों के लिए खोला जाना तथा मंदिर के शिखर पर धर्म-ध्वजारोहण की तिथियां हमारे इतिहास और संस्कृति की स्वर्णिम तिथियां हैं। प्राण प्रतिष्ठा के मर्मस्पर्शी अवसर पर मैंने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था। उस पत्र में मैंने यह भाव व्यक्त किया था, “यह हम सभी का सौभाग्य है कि हम सब अपने राष्ट्र के पुनरुत्थान के एक नए कालचक्र के शुभारंभ के साक्षी बन रहे हैं।” उन्होंने कहा कि हम सभी एक समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से वर्ष 2047 या शायद उससे पहले ही हम उन लक्ष्यों को प्राप्त कर लेंगे। इक्कीसवीं सदी में हमारे समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र की परिकल्पना राम-राज्य के वर्णन में प्राप्त होती है। गोस्वामी तुलसीदासजी कहते हैं, नहिं दरिद्र कोउ, दुखी न दीना। नहिं कोउ अबुध, न लच्छन हीना।। यानी राम-राज्य में न कोई दुखी है, न निर्धन है, न परावलंबी है, न बुद्धिहीन है और न ही कोई संस्कारहीन है। राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले दशक के दौरान 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी की सीमा रेखा से ऊपर लाया गया है तथा ऐसे प्रयास किए गए हैं ताकि वे गरीबी से मुक्त रहें। राम-राज्य का आदर्श आर्थिक समृद्धि और सामाजिक समरसता के उच्चतम मानकों को प्रस्तुत करता है। माता-शबरी से प्रभु श्रीराम का भावपूर्ण मिलन, निषाद-राज से उनका स्नेह-संबंध, युद्ध में कोल-भील-वानर आदि का सहयोग लेना, जटायु, जाम्बवन्त और गिलहरी आदि सभी को सम्मान तथा स्नेह और प्रेरणा देना, ऐसे अनेक प्रसंग एक सर्व-स्पर्शी तथा सर्व-समावेशी जीवन दर्शन को अपनाने का आदर्श प्रस्तुत करते हैं। आज के संदर्भ में मुझे यह देखकर खुशी होती है कि सामाजिक समावेश तथा आर्थिक न्याय के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जीव-जंतुओं की सुरक्षा के लिए भी बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय लक्ष्य तय किए गए हैं और उन्हें कार्यरूप दिया जा रहा है। उन्हाेंने कहा कि राम-राज्य के आदर्शों पर चलते हुए हम सब नैतिकता और धर्माचरण पर आधारित राष्ट्र का निर्माण कर सकेंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का आदर्श वाक्य है- रामो विग्रहवान् धर्म: अर्थात प्रभु श्रीराम धर्म के मूर्तिमान स्वरूप हैं। धर्म के व्यापक अर्थ के आधार पर निजी और सामूहिक जीवन को संचालित करके ही हम प्रभु श्रीराम की सच्ची पूजा-अर्चना कर पाएंगे। आज ‘साकेत’ यानी प्रभु श्रीराम की अयोध्या नगरी में हम सब यह संकल्प लें कि भारत माता के गौरव को विश्व समुदाय के शिखर पर ले जाएंगे। प्रभु श्रीराम की कृपा से हमारा यह संकल्प सिद्ध हो।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण रामराज्य की आधारशिला: याेगी आदित्यनाथ अयोध्या में श्रीराम यंत्र प्रतिष्ठापना कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर भारत के राष्ट्र मंदिर का प्रतीक बन गया है। यह रामराज्य की आधारशिला भी है। दुनिया में तमाम युद्ध चल रहे हैं, अव्यवस्था, आर्थिक अराजकता, भय-आतंक है और अयोध्याधाम में हम लोग भयमुक्त होकर राष्ट्रपति का अभिवादन करने के साथ ही श्रीराम यंत्र की स्थापना कार्यक्रम के सहभागी बनकर रामराज्य की अनुभूति कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत इसलिए भारत बना है, क्योंकि इसे ऋषि-मुनियों की तपस्या, अन्नदाता किसानों के परिश्रम, कारीगरों की उद्यमिता और भारत की आस्था ने सदैव ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के रूप में बनाए रखा। श्रीराम जन्मभूमि यज्ञ की पूर्णाहुति कार्यक्रम के साथ जुड़कर न केवल प्रदेशवासी, बल्कि देश-दुनिया के सनातन धर्मावलंबी के मन में भी आनंद की अनुभूति हो रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया के अंदर किसी देश के पास इतनी आबादी नहीं है, जितने हमारे यहां उत्तर प्रदेश में श्रीराम जन्मभूमि में, काशी विश्वनाथ धाम में, प्रयागराज महाकुम्भ में, मथुरा-वृंदावन में दर्शन करने के लिए लोग आए हैं। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भैयाजी, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मां अमृतानंदमयी, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, ट्रस्टी अनिल मिश्रा, सदस्य गोपाल एवं साधु संतों के साथ देश विदेश से आए हजारों गणमान्य आदि मौजूद रहे।
