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अशोक अनन्त
चतरा:जिंदगी और मौत का सफर तय कर दोजून की रोटी की जुगाड़ यानी पलायन का दंश एक बार फिर एक परिवार पर भारी पड़ा है। चतरा के प्रतापपुर निवासी रौशन कुमार, जो घर की गरीबी दूर करने के सपने लेकर चेन्नई जा रहे थे, उनकी ट्रेन से गिरकर दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे ने न केवल एक चिराग बुझा दिया, बल्कि राज्य में रोजगार की कमी पर भी तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।प्रतापपुर के देवी मंडप रोड निवासी रौशन कुमार (पिता- समोच प्रसाद) कल शाम करीब 3 बजे ट्रेन हादसे का शिकार हो गए। संतुलन बिगड़ने से वे चलती ट्रेन से नीचे जा गिरे और मौके पर ही उनकी सांसे थम गईं। घर की माली हालत सुधारने निकला जवान बेटा अब कभी लौटकर नहीं आएगा। इस घटना से पूरे गांव में मातम और आक्रोश है। बिलखते परिजनों ने जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से रौशन का पार्थिव शरीर घर मंगवाने और उचित मुआवजे की गुहार लगाई है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर स्थानीय स्तर पर रोजगार होता, तो आज रौशन जिंदा होता।
