Eksandeshlive Desk
रांची: राजधानी के रातू थाना क्षेत्र की जिस नाबालिग लड़की के लापता होने की खबर से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी, पुलिस ने उसका पदार्फाश कर लिया है। अब उस मामले में ऐसा खुलासा हुआ है जिसने हर किसी को अचंभित कर दिया है। बच्ची अब इस दुनिया में नहीं है। उसकी हत्या कर दी गई है। आरोप है कि हत्या के बाद शव को बिहार के गयाजी में ले जाकर जला दिया गया, ताकि पहचान व सबूत दोनों मिट जाए। बताते चलें कि बच्ची 13 मार्च की रात से ही लापता थी। पुलिस ने बताया कि लापता बच्ची की 13 मार्च की रात में ही उसके फुफेरे भाई राहुल पाठक उर्फ अक्षय ने हत्या कर दी थी। फिर शव को एंबुलेंस से गयाजी ले जाकर गुप्त तरीके से अंतिम संस्कार कर दिया। इस मामले में पुलिस ने सुबोध पाठक व उसके बेटे राहुल पाठक को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों ने पूछताछ में हत्या की बात स्वीकार कर ली है।
टोल प्लाजा की फोटो व तकनीकी जांच से खुला मामला
पुलिस ने जब मोबाइल व तकनीकी जानकारी खंगाली तो कुछ अहम सुराग मिले। इसके बाद पुलिस ने टोल प्लाजा के फोटो भी निकलवाए। इन्हीं सबूतों के आधार पर जब पुलिस ने सुबोध पाठक व राहुल पाठक से सख्ती से पूछताछ की तो दोनों टूट गए व उन्होंने हत्या की बात स्वीकार कर ली।
खुलासे के बाद आरोपी पिता-पुत्र गिरफ्तार
ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर के नेतृत्व में हुई जांच में घटना की परत-दर-परत खुलती चली गई। इसके बाद पुलिस ने आरोपी सुबोध पाठक व उसके पुत्र राहुल पाठक को गिरफ्तार कर लिया है। एंबुलेंस चालक पिंटू कुमार को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। इस मामले में एक अन्य आरोपी कमलेश मेमोरियल अस्पताल का संचालक अमरेश पाठक फरार है। उसने मृत बच्ची का गयाजी में अंतिम संस्कार कराने में मदद की थी। उसकी तलाश जारी है। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल एंबुलेंस (जेएच 01 एए 1245) जब्त कर ली है।
आरोपियों ने चार दिनों तक पुलिस को किया गुमराह
आरोपियों ने चार दिनों तक पुलिस व ग्रामीणों को गुमराह किया। लेकिन लगातार पूछताछ के बाद पांचवें दिन राहुल उर्फ अक्षय ने सच्चाई स्वीकार कर ली। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। पुलिस की जांच में पारिवारिक विवाद व प्रेम-प्रसंग की बात सामने आई है। जानकारी के अनुसार, सुबोध पाठक व उसके बेटे अक्षय के बीच अक्सर विवाद होता था। घटना की रात में भी दोनों के बीच झगड़ा हुआ, जिसमें उसकी चचेरी बहन ने अपने फूफा सुबोध का पक्ष लिया। इससे नाराज होकर चचेरे भाई राहुल ने उसका गला घोंट दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। बताया जाता है कि बच्ची का राहुल के साले के साथ प्रेम-प्रसंग भी परिवार को नागवार गुजर रहा था, जिसे लेकर भी तनाव था।
अस्पताल संचालक की भूमिका है संदिग्ध
घटना के बाद कमलेश मेमोरियल अस्पताल के संचालक अमरेश पाठक मौके पर सुबोध पाठक के घर पहुंचा व बच्ची को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद उसकी मदद से एंबुलेंस के जरिए शव को गयाजी ले जाकर श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
पड़ोसियों का शक बना सुराग
घटना की रात बच्ची के चीखने की आवाज सुनकर पड़ोसियों को शक हुआ। दो अप्रैल को ग्रामीणों ने जब सख्ती से पूछताछ की, तो मामला संदिग्ध लगने लगा। इसके बाद पुलिस ने जांच तेज की व सच्चाई सामने आ गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है व फरार आरोपी की तलाश में छापेमारी कर रही है। पूरे क्षेत्र में घटना को लेकर सनसनी व आक्रोश का माहौल है।
