
मेसरा (रांची): बीआईटी मेसरा स्थित प्राचीन माँ रक्षा काली मंदिर में आस्था,परंपरा और सांप्रदायिक सौहार्द का अनूठा संगम देखने को मिला। अवसर था 165 वर्षों से चली आ रही वार्षिक पूजा का,जहाँ माता के दर्शन के लिए न केवल झारखंड,बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी हजारों श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। पूरी रात ‘जय माँ काली’ के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा। परंपरा के अनुसार,पश्चिम बंगाल से आए विशेष विद्वान पुरोहितों की टोली ने मध्य रात्रि में माँ रक्षा काली की विशेष पूजा और बलि अनुष्ठान संपन्न कराया। मान्यता है कि माँ के इस दरबार से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। इसी विश्वास के साथ हजारों महिलाओं ने निर्जला उपवास रखकर माता से सुख-समृद्धि की कामना की। आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल कांके विधायक सुरेश कुमार बैठा ने कहा कि यह मंदिर हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। उन्होंने 165 वर्षों से एक ही परिवार (राज परिवार) द्वारा इस परंपरा को संजोए रखने की सराहना की। विशिष्ट अतिथि जिला परिषद सदस्य संजय कुमार महतो और थाना प्रभारी अजय कुमार दास ने भी माता का आशीर्वाद लिया। आयोजन समिति के अध्यक्ष भगवान शेखर ने बताया कि,यह पूजा हमारे पूर्वजों की विरासत है। माँ की कृपा है कि आज यह आयोजन एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है,जहाँ दूर-दराज से लोग मन्नतें लेकर पहुँचते हैं। पूजा के साथ आयोजित भव्य मेले ने उत्सव की रौनक बढ़ा दी। बच्चों के लिए लगे झूले और विभिन्न व्यंजनों के स्टॉल्स का लोगों ने जमकर लुत्फ उठाया। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस की टीम मुस्तैद रही,जिससे सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता बनी रही। आयोजन को सफल बनाने में वृंदा शेखर,आयुष शेखर,पियूष शेखर,अमर शेखर,बालमुकुंद सिंह,मुकेश ठाकुर और कामेश्वर प्रजापति सहित स्थानिय ग्रामीणों की भूमिका अहम रही।
