By Washim
बालूमाथ : आदिवासी लोहरा समाज ने जिले के अनुसूचित जनजाति वर्ग के नागरिकों को आ रही प्रशासनिक समस्याओं के समाधान के लिए उपायुक्त को एक मांग पत्र सौंपा है। समाज ने उपायुक्त से अपनी अध्यक्षता में जिले के सभी अंचल अधिकारियों ), अनुमंडल अधिकारियों और कल्याण पदाधिकारियों के साथ एक संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित करने का आग्रह किया है।
मुख्य समस्या: ऑनलाइन सिस्टम और दस्तावेजी त्रुटियाँ
जनसंख्या और पहचान: वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार लातेहार जिले में लोहरा अनुसूचित जनजाति (सूची क्रमांक-21) की आबादी लगभग 18,028 है।खतियानी विसंगति: पुराने भू-दस्तावेजों (खतियान) में जाति के कॉलम में लिपिकीय त्रुटि के कारण ‘लोहार’, ‘लोहर’, ‘लहार’ या ‘लोहरा’ अंकित हो गया है। प्रमाण पत्र में रुकावट : जब से जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया ऑनलाइन हुई है, तब से इन विसंगतियों के कारण विभागीय स्तर पर समाज के लोगों के आवेदन लंबित हो जा रहे हैं, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं और संवैधानिक अधिकारों का लाभ उठाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पहले भी हो चुकी हैं बैठकें
दस्तावेजों के अनुसार, इससे पूर्व भी वर्ष 2019 में तत्कालीन उपायुक्त की अध्यक्षता में इस गंभीर विषय पर कई बैठकें (जैसे 23 फरवरी, 2 अगस्त और 5 अगस्त 2019 को) आयोजित की जा चुकी हैं। उन बैठकों में मैन्युअल के बजाय ऑनलाइन आवेदन के प्रारूप को एक समान करने, खतियान के साथ-साथ रहन-सहन और गोत्र की जांच करने तथा सरकार से उचित मार्गदर्शन मांगने जैसे निर्णय लिए गए थे।
प्रतिनिधिमंडल की मांग
लोहरा समाज का कहना है कि समय-समय पर नए अधिकारियों के आगमन और प्रशासनिक शिथिलता के कारण पूर्व में लिए गए निर्णयों पर त्वरित और नियमसंगत कार्रवाई नहीं हो पा रही है। अतः समाज के लगभग 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ एक विशेष बैठक की तिथि और समय निर्धारित किया जाए, जिसमें निबंधन पदाधिकारी की उपस्थिति भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए ताकि इस ज्वलंत समस्या का कोई स्थायी समाधान निकाला जा सके।
