तालाब को निगलने की तैयारी में माफिया , ग्रामीणों को उठा लेने की धमकी

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By mustaffa

​मेसरा (रांची): राजधानी रांची से सटे ओरमांझी प्रखंड में भू-माफियाओं और दलालों का दुस्साहस इस कदर बढ़ गया है कि अब वे जनहित के सरकारी जलाशयों को भी बेचने से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला मौजा खटंगा और उलातू की सीमा पर स्थित करीब 100 वर्ष पुराने ऐतिहासिक तालाब का है,जिस पर भू-माफियाओं द्वारा अवैध कब्जा कर उसकी धड़ल्ले से खरीद-बिक्री की जा रही है। इस अवैध धंधे से आक्रोशित और डरे हुए दोनों गांवों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर अंचलाधिकारी (सीओ) ओरमांझी को एक लिखित शिकायती पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। आवेदन में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यह तालाब दोनों गांवों का एक अभिन्न अंग है। सदियों से ग्रामीणों के नहाने,दैनिक निस्तार और उनके मवेशियों को पानी पिलाने का यह एकमात्र जरिया है। इसके अलावा क्षेत्र में पानी का दूसरा कोई सुलभ विकल्प उपलब्ध नहीं है। जन्म,मुंडन,विवाह से लेकर श्राद्ध कर्म जैसे सभी सामाजिक और पारंपरिक रीति-रिवाज इसी तालाब के किनारे संपन्न होते हैं। ऐसे में इस जलस्रोत के खत्म होने से दोनों गांवों के सामने जीवन और पानी का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। ​इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला और गंभीर पहलू स्थानीय पुलिस-प्रशासन की भूमिका है। ग्रामीणों ने लिखित रूप से आरोप लगाया है कि इस अवैध कब्जे में ओरमांझी थाना के कुछ पुलिसकर्मियों की भू-माफियाओं के साथ मिलीभगत है। जब भी ग्रामीण इस अवैध कारोबार और अतिक्रमण का विरोध करते हैं,तो दलाल उन्हें तरह-तरह की धमकियां देते हैं। आरोप है कि विवाद होने पर पुलिस प्रशासन माफियाओं पर कार्रवाई करने के बजाय मौके पर आकर ग्रामीणों को ही डराता-धमकाता है और उन्हें वहां से उठा लेने (गिरफ्तार करने या गायब करने) की बात कहता है। ​इस तालाब के सार्वजनिक और सरकारी होने का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि पूर्व में प्रखंड कार्यालय,ओरमांझी और भूमि संरक्षण विभाग,रांची द्वारा इस जलाशय की सुरक्षा और संवर्धन के लिए लाखों रुपये की सरकारी राशि खर्च कर इसका जीर्णोद्धार कराया जा चुका है। सरकारी पैसे से चमकाए गए इस तालाब को अब निजी फायदे के लिए बेचा जा रहा है। ​ग्रामीणों ने अपनी शिकायत के साथ भूमि का पूरा आधिकारिक विवरण भी अंचलाधिकारी को सौंपा है,ताकि कार्रवाई में कोई ढील न रहे। ​कुल प्रभावित रकबा 2.58 एकड़ (जलाशय भूमि),​मौजा खटंगा,खाता नं. 27,प्लॉट नं. 330 (53 डीसमिल),खाता नं. 66,प्लॉट नं. 329 (59 डीसमिल) एवं प्लॉट नं. 326 (42 डीसमिल)। ​मौजा उलातू (थाना नं. 60),खाता नं. 173,प्लॉट नं. 201 (रकबा 1.04 एकड़)। ​मामले की गंभीरता और स्थानीय स्तर पर पुलिस-प्रशासन की संदिग्ध भूमिका को देखते हुए ग्रामीणों ने इस आवेदन की प्रतिलिपि आयुक्त,रांची और ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (एसपी),रांची को भी प्रेषित की है। ग्रामीणों (मुख्य हस्ताक्षरकर्ता रोबीत मुंडा व अन्य) ने मांग की है कि इस भू-माफिया-प्रशासन गठजोड़ की उच्च स्तरीय जांच की जाए,ऐतिहासिक तालाब को बचाया जाए और ग्रामीणों को सुरक्षा प्रदान की जाए।

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