Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली : केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने फिल्म सतलुज को लेकर अपना विरोध और तेज करते हुए फिल्म निर्माता एवं निर्देशक को खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि यदि फिल्म में दावा किए गए पंजाब में आतंकवाद के दौर में 25,000 लोग लापता हुए, तो इसके समर्थन में सभी दस्तावेजी साक्ष्य और आधिकारिक रिकॉर्ड जनता के सामने प्रस्तुत किए जाएं। बिट्टू ने स्पष्ट कहा कि यदि फिल्म निर्माता अपने दावों को प्रमाणित कर देते हैं, तो वह सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए तैयार हैं, लेकिन यदि ऐसे प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए जाते तो वह इस मामले में आगे की कार्रवाई करेंगे। रवनीत सिंह बिट्टू ने सोमवार को यहां रेल भवन में पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया कि फिल्म में पंजाब के आतंकवाद के दौर के इतिहास को एकतरफा दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। फिल्म में केवल एक पक्ष को प्रमुखता दी गई है, जबकि उस दौर में आतंकवाद का शिकार हुए हजारों निर्दोष लोगों की पीड़ा को नजरअंदाज किया गया है।
बिट्टू ने सवाल उठाया कि यदि इतिहास को दिखाया जा रहा है तो उसमें उन निर्दोष हिंदुओं, बस यात्रियों, दुकानदारों, सरकारी कर्मचारियों, मजदूरों और आम नागरिकों के नरसंहार को क्यों नहीं दिखाया गया, जिन्हें आतंकवाद के दौर में अपनी जान गंवानी पड़ी। उनका कहना था कि किसी भी ऐतिहासिक घटना को प्रस्तुत करते समय सभी पक्षों और सभी पीड़ितों के साथ न्याय होना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने फिल्म पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि फिल्म में तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा गया है। उन्होंने विशेष रूप से अपने दादा एवं पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह का उल्लेख करते हुए कहा कि फिल्म में उनकी भूमिका को जिस प्रकार दर्शाया गया है, वह वास्तविक घटनाओं से मेल नहीं खाती। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की गिरफ्तारी से पहले ही उनके दादा बेअंत सिंह शहीद हो चुके थे, इसलिए उस घटना में उनकी कोई भूमिका नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि कुछ लोग केवल उनके खिलाफ बोलने के लिए मुद्दे तलाशते रहते हैं और इससे उनकी दुकानदारी चलती है। बिट्टू के अनुसार फिल्म को लेकर पहले किसी को विशेष जानकारी नहीं थी, लेकिन अभिनेता दिलजीत दोसांझ के बड़े नाम के कारण फिल्म को व्यापक चर्चा और दर्शक मिल रहे हैं।
