सिविल जज जूनियर डिवीजन नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर हाई कोर्ट में 31 को सुनवाई

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Eksandeshlive Desk

रांची: झारखंड सरकार की ओर से नोटिफिकेशन जारी कर सिविल जज जूनियर डिवीजन परीक्षा की नियुक्त प्रक्रिया रद्द करने के आदेश को निरस्त करने का आग्रह से संबंधित याचिका पर झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। प्रार्थी की ओर से इसकी जल्द सुनवाई का आग्रह गुरुवार को उच्च न्यायालय में किया गया। उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 31 अगस्त निर्धारित की है। आदित्य भास्कर और आयुष कुमार वर्मा ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर सिविल जज जूनियर डिवीजन (विज्ञापन संख्या 22 /2023) को चुनौती दी है। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अभय आनंद और सोनल ने पक्ष रखा। उल्लेखनीय है कि सीआईडी जांच में मिले तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात उन सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी, जिसमें टीडीपीएल शामिल रहा है। इसके अलावा वर्ष 2014 से हुई सभी नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितता के मद्देनजर जांच कराने की घोषणा भी की गयी थी। इन घोषणाओं के मद्देनजर कार्मिक प्रशासनिक विभाग ने परीक्ष रद्द करने, परीक्षा प्रक्रिया स्थगित करने और जांच कराने से संबंधित अधिसूचना जारी की है। इसमें 22 परीक्षाओं को रद्द करने, 6 की प्रक्रिया को स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में शामिल करने का उल्लेख किया गया है।

एपीपी नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के आदेश पर रोक से जुड़ी याचिका पर उच्च न्यायालय में 28 को सुनवाई: झारखंड सरकार की ओर से नोटिफिकेशन जारी कर अस्सिटेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (एपीपी) रेगुलर एवं बैकलॉग परीक्षाओं की नियुक्त प्रक्रिया पर रोक लगाने के आदेश को निरस्त करने का आग्रह करने वाली याचिका की सुनवाई झारखंड उच्च न्यायालय में हुई। कोर्ट ने मामले में प्रार्थी को याचिका का प्रति (फोटो कॉपी) जेपीएससी को सौंपने का निर्देश दिया। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 अगस्त (शुक्रवार) की निर्धारित की। जिन परीक्षाओं की नियुक्ति प्रक्रिया की रोक को चुनौती दी गई है, उनमें अस्सिटेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर रेगुलर परीक्षा (विज्ञापन संख्या 6/2025) और अस्सिटेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर बैकलॉग परीक्षा (विज्ञापन संख्या 5/2025) शामिल है। मामले में आलोक रंजन, आदित्य भास्कर, आनंद सिंह और अनिरुद्ध ओझा ने याचिका दाखिल की है। इसके अलावा अस्सिटेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (एपीपी) रेगुलर परीक्षा नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने से संबंधित सत्यांशु शुभम की याचिका पर भी सुनवाई हुई। कोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक हटाने से इनकार कर दिया। साथ ही जेपीएससी और सरकार से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता रौनक सहाय एवं श्रीकांत स्वरूप ने पक्ष रखा। उल्लेखनीय है कि सीआईडी जांच में मिले तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात उन सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी, जिसमें टीडीएल शामिल रहा है। इसके अलावा वर्ष 2014 से हुई सभी नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितता के मद्देनजर जांच कराने की घोषणा भी की गयी थी। इन घोषणाओं के मद्देनजर कार्मिक प्रशासनिक विभाग ने परीक्ष रद्द करने, परीक्षा प्रक्रिया स्थगित करने और जांच कराने से संबंधित अधिसूचना जारी की है। इसमें 22 परीक्षाओं को रद्द करने, 6 की प्रक्रिया को स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में शामिल करने का उल्लेख किया गया है।

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