हेमंत अहीर को मिला कुड़मालि में गोल्ड मेडल

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रात में सिक्योरिटी गार्ड की ड्यूटी, दिन में पढ़ाई कर हासिल किया मुकाम

Eksandeshlive Desk

रांची: रात में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी और दिन में कॉलेज की पढ़ाई करते हुए हेमंत अहीर ने अपनी मेहनत के दम पर बड़ी शैक्षणिक उपलब्धि हासिल की है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू), रांची के कुड़मालि भाषा के छात्र हेमंत अहीर ने स्नातकोत्तर सत्र 2023-2025 में 72.75 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपने विषय में प्रथम स्थान हासिल किया और गोल्ड मेडल अपने नाम किया। 24 सितंबर 2026 को रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत मंडप में आयोजित डीएसपीएमयू के तृतीय दीक्षांत समारोह में उन्हें गोल्ड मेडल और उपाधि प्रदान की गई। समारोह में विभिन्न विषयों के कुल 142 गोल्ड मेडलिस्ट विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। समारोह में राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष गंगवार, डीएसपीएमयू के कुलपति प्रो. (डॉ.) राजीव मनोहर सहित कई शिक्षाविद उपस्थित रहे। हेमंत अहीर को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य डॉ. राकेश मोहन और डीएसपीएमयू के पूर्व कुलपति डॉ. सत्यनारायण मुंडा ने गोल्ड मेडल प्रदान किया।

रात में गार्ड की नौकरी, दिन में कॉलेज: हेमंत की सफलता के पीछे संघर्ष का लंबा सफर रहा है। रांची में रहकर पढ़ाई और रहने का खर्च उठाने के लिए उन्होंने पढ़ाई के साथ कई तरह के काम किए। कभी परीक्षा ड्यूटी की, कभी वेटर के रूप में काम किया तो कभी वीडियो-फोटो एडिटिंग और लेखन को आय का जरिया बनाया। वर्तमान में हेमंत एक निजी एजेंसी में नाइट सिक्योरिटी गार्ड के रूप में कार्यरत हैं। रातभर ड्यूटी करने के बाद वे दिन में कॉलेज पहुँचकर अपनी पढ़ाई करते रहे। इस दौरान उनकी पुरानी साइकिल भी संघर्ष की साथी बनी। इसी साइकिल से वे नौकरी और कॉलेज के बीच आवागमन करते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी और अंततः विश्वविद्यालय में अपने विषय के टॉपर बने।

स्नातक में सेकेंड टॉपर, पीजी में मिला गोल्ड: हेमंत ने सत्र 2020-2023 में कुड़मालि भाषा से स्नातक की पढ़ाई की थी। स्नातक में वे अपने विषय में दूसरे स्थान पर रहे थे। इसके बाद सत्र 2023-2025 में स्नातकोत्तर की पढ़ाई शुरू की और इस बार प्रथम स्थान हासिल कर गोल्ड मेडल प्राप्त किया। आर्थिक परिस्थितियों के कारण उच्च शिक्षा का सफर उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने बीपीएल कोटा के माध्यम से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद हेमन्त अब अपने अगले लक्ष्य की तैयारी में जुटे हैं। वे यूजीसी नेट उत्तीर्ण कर चुके हैं और अब जेआरएफ की तैयारी कर रहे हैं। उनका लक्ष्य जेआरएफ के बाद पीएचडी करना और विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनना है। हेमंत का अपनी मातृभाषा, साहित्य, कला और संस्कृति से भी गहरा लगाव है। वे भविष्य में कुड़मालि भाषा और झारखंड की कला-संस्कृति के संरक्षण एवं विकास के लिए काम करना चाहते हैं।

पिता के संघर्ष से मिली प्रेरणा: हेमंत के पिता कार्तिक अहीर ने भी कठिन परिस्थितियों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में लंबा सफर तय किया। उन्होंने लंबे समय तक पारा-शिक्षक के रूप में सेवाएं दीं। सेवानिवृत्ति से करीब दो महीने पहले उन्होंने सहायक आचार्य के पद पर योगदान दिया और बाद में सेवानिवृत्त हुए। हेमंत बताते हैं कि पिता के संघर्ष और शिक्षा के प्रति समर्पण ने उन्हें शिक्षक बनने की प्रेरणा दी। वे भी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़कर प्रोफेसर बनना चाहते हैं। हेमंत की उपलब्धि के साथ उनके परिवार के नाम एक खास संयोग भी जुड़ गया है। वे परिवार के तीसरे गोल्ड मेडलिस्ट हैं। इससे पहले बबली कुमारी ने रांची विश्वविद्यालय से मुण्डारी विषय में सत्र 2021-2023 में गोल्ड मेडल हासिल किया था। इसके बाद सुदर्शन अहीर ने डीएसपीएमयू से पंचपरगनिया विषय में सत्र 2022-2024 में गोल्ड मेडल प्राप्त किया। अब हेमंत ने सत्र 2023-2025 में कुड़मालि विषय में गोल्ड मेडल हासिल किया है। परिवार के ये तीनों गोल्ड मेडल झारखंड की मुण्डारी, पंचपरगनिया और कुड़मालि भाषाओं से जुड़े हैं।

सफलता का श्रेय परिवार और गुरुजनों को: हेमंत ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, चाचा-चाची, भाई-बहनों, गुरुजनों और साथियों को दिया है। गोल्ड मेडल मिलने के बाद विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, रिश्तेदारों और पांच परगना क्षेत्र के लोगों ने उन्हें बधाई दी। रात में सिक्योरिटी गार्ड की वर्दी पहनकर ड्यूटी करने और दिन में पुरानी साइकिल से कॉलेज पहुंचकर पढ़ाई करने वाले हेमंत का अगला लक्ष्य अब जेआरएफ, पीएचडी और विश्वविद्यालय में अध्यापन है। आर्थिक चुनौतियों के बीच गोल्ड मेडल तक पहुंचा उनका सफर मेहनत और शिक्षा के प्रति निरंतरता की कहानी बयां करता है।

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