भारत-अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण पर बातचीत शुरू की

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली : भारत और अमेरिका ने मंगलवार को अपने प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण पर बातचीत शुरू की। दोनों देशों के बीच यह बैठक वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के मुख्यालय वाणिज्य भवन में चल रही है। इस वार्ता का नेतृत्व केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर कर रहे हैं। दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की शुरुआत की। ये बैठक इस महीने की शुरुआत (2-4 जून) में राष्ट्रीय राजधानी में समझौते को लेकर मुख्य वार्ताकारों के स्तर पर हुई बातचीत के बाद हो रही है। इससे पहले राजेश अग्रवाल ने 15 जून को कहा था कि दोनों मंत्रियों के बीच बातचीत मुख्य रूप से फ्रेमवर्क समझौते को अंतिम रूप देने पर केंद्रित रहने की उम्मीद है। केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और भारत के मुख्य वार्ताकार और वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन भी इस बैठक में शामिल हैं। इससे पहले केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ‘एक्स’ पर एक जारी पोस्ट में कहा कि भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से वाणिज्य विभाग अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर, भारत में अमेरिका के एंबेसडर सर्जियो गोर और उनके प्रतिनिधिमंडल का हार्दिक स्वागत है। हम द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर सार्थक चर्चा की उम्मीद कर रहे हैं।

जयराम रमेश बोले-किसानों के लिए नुकसानदेह अमेरिकी ट्रेड डील पर मलेशिया से सबक ले सरकार : कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश का कहना है कि भारत पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका व्यापार के दौरान कानूनों का उल्लंघन करने वाली जांच का इस्तेमाल कर रहा है, ताकि भारत 6 फरवरी को घोषित ट्रेड डील पर हस्ताक्षर कर दे। उन्होंने कहा कि यह डील भारत के हितों के खिलाफ है और इससे विभिन्न राज्यों के किसानों को गंभीर नुकसान होगा। भारत को किसी भी ऐसी ट्रेड डील के झांसे में आने से बचते हुए मलेशिया से सबक लेना चाहिए, जिसने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका के साथ अपनी ट्रेड डील को ठुकरा दिया। रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि भारत लगभग 60 अन्य देशों के साथ अमेरिकी कानूनों का उल्लंघन करने वाली गलत ट्रेड प्रैक्टिस के आरोप में जांच के दायरे में है। इस जांच के अंतिम निष्कर्ष आने वाले कुछ सप्ताहों में सामने आ सकते हैं। अमेरिका बहुत कम ठोस प्रतिबद्धताएं करता है, जबकि भारत को अपने मौजूदा वार्षिक आयात स्तर को कम से कम तीन गुना करने की प्रतिबद्धता जतानी पड़ रही है। रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में राहुल गांधी द्वारा चीन के मुद्दे उठाए जाने के दबाव में अमेरिका के साथ संयुक्त बयान जारी किया था। इस बयान में अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का वादा किया था, जबकि भारत ने अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर टैरिफ समाप्त करने या भारी कटौती करने तथा पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर तक की खरीद करने का वादा किया था। रमेश ने कहा कि 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप की रेसिप्रोकल टैरिफ (पारस्परिक आयात शुल्क) नीति को अवैध करार दिया, जिससे भारत को दी गई टैरिफ रियायत रातोंरात समाप्त हो गई। इसके बाद अमेरिका ने भारत सहित सभी व्यापारिक साझेदारों पर अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया, जिसका कानूनी आधार 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि जापान और यूरोपीय संघ के साथ ट्रेड डील होने के बावजूद अमेरिका ने उन पर भी टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी है। ऐसे में भारत को किसी भी ऐसी ट्रेड डील पर हस्ताक्षर करने के लिए झांसे में नहीं आना चाहिए जो देश के हितों के खिलाफ हो। रमेश ने सुझाव दिया कि मोदी सरकार को मलेशिया से प्रेरणा लेनी चाहिए, जिसने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका के साथ अपनी ट्रेड डील को ठुकरा दिया।

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