Eksandeshlive Desk
कोलकाता : दक्षिण पूर्व रेलवे ने चालू वित्तीय वर्ष में स्क्रैप निपटान के क्षेत्र में अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन जारी रखते हुए अप्रैल से जुलाई 2026 की प्रथम चार माह की अवधि में 201.20 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्क्रैप विक्रय का आंकड़ा प्राप्त किया है। यह किसी भी वित्तीय वर्ष के अप्रैल-जुलाई अवधि के दौरान दक्षिण पूर्व रेलवे द्वारा अब तक की सर्वाधिक स्क्रैप बिक्री है। स्क्रैप निपटान से अर्जित राजस्व पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 31.85 प्रतिशत अधिक तथा इस अवधि के अनुपातिक लक्ष्य से 57.80 प्रतिशत अधिक है। इस उपलब्धि के साथ दक्षिण पूर्व रेलवे वर्तमान में स्क्रैप निपटान से प्राप्त राजस्व के मामले में सभी जोनल रेलों में अग्रणी है तथा चालू वित्तीय वर्ष के प्रथम चार माह में 200 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने वाली पहली एवं एकमात्र जोनल रेलवे बन गई है।
भारतीय रेल में स्क्रैप निपटान एक प्रमुख प्राथमिकता का क्षेत्र है, क्योंकि इससे न केवल उल्लेखनीय राजस्व प्राप्त होता है, बल्कि रेलवे परिसरों को स्वच्छ बनाए रखनेए रेलवे परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग तथा परिचालन दक्षता में वृद्धि के माध्यम से भारत सरकार के स्वच्छता अभियान को भी बल मिलता है। यह उल्लेखनीय उपलब्धि दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक एके जैन के मार्गदर्शन में संभव हुई है। उन्होंने दक्षिण पूर्व रेलवे में अक्टूबर 2026 तक ‘जीरो स्क्रैप’ का लक्ष्य प्राप्त करने के विज़न पर निरंतर बल दिया है। इसी लक्ष्य के अनुरूप, भंडार विभाग द्वारा पूरे जोन में व्यापक स्तर पर सर्वेक्षण एवं विशेष अभियान चलाकर डिपो, कार्यशालाओं, शेडों तथा अन्य रेलवे प्रतिष्ठानों में वर्षों से जमा स्क्रैप की पहचानए पृथक्करण एवं निपटान सुनिश्चित किया जा रहा है। इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप जुलाई 2026 तक दक्षिण पूर्व रेलवे के 15 स्क्रैप-उत्पादक इकाइयों ने ‘जीरो स्क्रैप’ का दर्जा प्राप्त कर लिया है। दक्षिण पूर्व रेलवे इस गति को बनाए रखते हुए अक्टूबर 2026 तक सभी चिन्हित स्क्रैप-उत्पादक इकाइयों को स्क्रैप-मुक्त बनाने के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। इन पहलों से परिचालन दक्षता में वृद्धि, स्वच्छता एवं हाउसकीपिंग मानकों में सुधार, परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग तथा भारतीय रेल के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित होगा।
