Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली : द्वितीय भारत-रूस शिक्षा शिखर सम्मेलन-2026 (आईआरईएस-2026) का गुरुवार को यहां के ली मेरीडियन होटल में शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के पहले दिन दोनों देशों के शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं, विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने चिकित्सा शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), छात्र विनिमय और संयुक्त अनुसंधान जैसे विषयों पर चर्चा की। सम्मेलन में शैक्षणिक सहयोग, संस्थागत साझेदारी और भविष्य केंद्रित शिक्षा मॉडल को मजबूत करने पर जोर दिया गया। रूसी शिक्षा संस्था, भारत में रूसी दूतावासा रॉसोट्रुडनिचेस्टवो और नई दिल्ली स्थित रशियन हाउस के सहयोग से इस शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्घाटन भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव, रॉसोट्रुडनिचेस्टवो के प्रतिनिधि कार्यालय की प्रमुख डॉ. एलेना रेमिजोवा, रूस की उप स्वास्थ्य मंत्री डॉ. तात्याना सेम्योनोवा, रॉसोट्रुडनिचेस्टवो के उप प्रमुख डॉ. पावेल शेवत्सोव ने संयुक्त रूप से किया।
उद्घाटन समारोह में रूस के कृषि मंत्रालय के शिक्षा विभाग की निदेशक यूलिया कोंदिकोवा और भारतीय प्रतिनिधियों में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अभिजात चंद्रकांत शेठ, भारतीय विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष प्रो विनय कुमार पाठक, हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो केसी शर्मा, भारतीय विश्वविद्यालय संघ की महासचिव डॉ. पंकज मित्तल, एमिटी शिक्षा समूह के कुलपति प्रो गुरिंदर सिंह, शारदा समूह संस्थानों के संस्थापक एवं अध्यक्ष पीके गुप्ता सहित तमाम लोग शामिल हुए।सम्मेलन के पहले दिन चार प्रमुख पैनल चर्चाओं का आयोजन किया गया, जिनमें चिकित्सा शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, एआई, रोबोटिक्स एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी, कृषि, खाद्य सुरक्षा, खेल, युवा सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इन चर्चाओं ने छात्र विनिमय, फैकल्टी एक्सचेंज, संयुक्त अनुसंधान, शैक्षणिक साझेदारी और दीर्घकालिक संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। रूस एजुकेशन संस्था के उपाध्यक्ष एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) डॉ. पवन कपूर ने कहा कि आईआरईएस ने भारत और रूस के बीच शैक्षणिक संवाद और संस्थागत सहयोग को नई मजबूती दी है, जिससे भविष्य केंद्रित शैक्षणिक साझेदारियों के नए अवसर पैदा हुए हैं। डॉ. एलेना रेमिजोवा ने कहा कि यह सम्मेलन भारत और रूस के बीच मजबूत शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है और विश्वविद्यालयों, छात्रों तथा संस्थानों के बीच सहयोग के नए अवसर उपलब्ध कराता है। सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के विश्वविद्यालयों, शिक्षाविदों और संस्थाओं के बीच संस्थागत संपर्क और द्विपक्षीय संवाद भी आयोजित किए गए। सम्मेलन का उद्देश्य शिक्षा कूटनीति को आगे बढ़ाना तथा भविष्य केंद्रित शैक्षणिक सहयोग को नई दिशा देना है।
