रांची: भारत की अर्थव्यवस्था की वास्तविक रीढ़ हमारे करोड़ों छोटे दुकानदार, खुदरा व्यापारी, एमएसएमई और कुटीर उद्योग हैं। जब गांव, कस्बे और छोटे शहरों का व्यापारी बिना किसी भय और जटिल कानूनी कागजी कार्रवाई के स्वतंत्र होकर व्यापार करता है, तभी देश की अर्थव्यवस्था सशक्त होती है। 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में लिए गए दूरगामी और साहसिक निर्णय इसी दिशा में एक युगांतरकारी कदम हैं। यह केवल कर सुधार नहीं, बल्कि देश के ईमानदार करदाताओं के प्रति सरकार के अटूट विश्वास का प्रमाण है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मोदी 3.0 का संकल्प स्पष्ट है—व्यापारियों के जीवन और कारोबार को आसान बनाना और अनावश्यक सरकारी हस्तक्षेप को समाप्त करना।लंबे समय से छोटे व्यापारियों के मन में प्रक्रियात्मक चूकों पर गिरफ्तारी और मुकदमों का डर बना रहता था। जीएसटी परिषद ने धारा 69 के तहत अधिकारियों के गिरफ्तारी के सीधे प्रावधान को समाप्त करने की ऐतिहासिक संस्तुति की है। इसके साथ ही अभियोजन की सीमा को 1 करोड़ से बढ़ाकर सीधे 5 करोड़ कर दिया गया है तथा सामान्य दंड 25,000 से घटाकर 10,000 कर दिया गया है। 10,000 से कम के कर मामलों में नोटिस न भेजने का निर्णय भी छोटे व्यापारियों को बेवजह की मुकदमेबाजी से मुक्ति दिलाएगा। यह बदलाव ‘इंस्पेक्टर राज’ के अंतिम अवशेषों को मिटाकर पारदर्शी एवं विश्वास-आधारित प्रणाली स्थापित करता है। 5 करोड़ तक के वार्षिक कारोबार वाले छोटे व्यापारियों के लिए प्रस्तावित ‘वार्षिक रिटर्न और तिमाही कर भुगतानव्यवस्था सबसे व्यावहारिक सुधारों में से एक है। पहले छोटे कारोबारी हर महीने सीए के दफ्तरों के चक्कर काटने और रिटर्न फाइल करने में ही अपनी ऊर्जा गंवा देते थे। अब वे अनुपालन के तनाव से मुक्त होकर अपने व्यवसाय के विस्तार और ग्राहकों की संतुष्टि पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। डिजिटल इंडिया के इस युग में छोटे दुकानदारों और महिला उद्यमियों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से अंतर-राज्यीय व्यापार की सुविधा देना एक बड़ा गेम-चेंजर साबित होगा। अब दूसरे राज्यों में अलग से भौतिक कार्यालय या गोदाम स्थापित करने की बाध्यता नहीं रहेगी। दूरदराज के हस्तशिल्पी और स्थानीय उत्पादक अब पूरे देश के बाजार से सीधे जुड़ सकेंगे। वहीं, माल परिवहन में वाहनों की अकारण चेकिंग को रोककर केवल पुख्ता खुफिया सूचना और उच्च अधिकारियों की पूर्व अनुमति तक सीमित करने से लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और सप्लाई चेन तेज होगी। व्यापार की सबसे बड़ी जरूरत नकदी तरलता होती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 90 प्रतिशत पात्र रिफंड दावों को मात्र 3 कार्य दिवसों में स्वतजारी करना और आवेदन स्वीकृति की समय-सीमा 15 से घटाकर 10 दिन करना एमएसएमई क्षेत्र के लिए संजीवनी के समान है। पैसा सरकारी प्रक्रियाओं में महीनों तक अटका नहीं रहेगा, जिससे व्यापारियों को बैंक कर्जों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा
