फ्लाई ऐश ढुलाई पर ग्रहण: एनटीपीसी की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

360° Ek Sandesh Live STORY

KULDEEP RAM

टंडवा: चतरा में हाइवा छोड़ो आंदोलन का असर अब एनटीपीसी नॉर्थ करणपुरा परियोजना की फ्लाई ऐश ढुलाई व्यवस्था पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। आंदोलन की शुरुआत के बाद से 9 अगस्त से फ्लाई ऐश की ढुलाई प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है। यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो ऐश डाइक में भंडारण क्षमता को लेकर गंभीर संकट खड़ा होने की आशंका जताई जा रही है। जानकारों के अनुसार एनटीपीसी प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश के नियमित निष्पादन के लिए परिवहन व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक ढुलाई बाधित रहने पर ऐश डाइक की क्षमता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, डाइक कितने समय में पूरी तरह भर जाएगी और इसका बिजली उत्पादन पर वास्तविक असर कब पड़ेगा, इसकी आधिकारिक पुष्टि एनटीपीसी की ओर से नहीं की गई है।

आंदोलन, हाइवा और टिप-टेलर के बीच उलझा मामला। बताया जाता है कि चतरा हाइवा छोड़ो आंदोलन के दौरान टिप-टेलर के परिचालन पर रोक लगाने की मांग प्रमुखता से उठी थी। इस मांग को विस्थापित हाइवा एसोसिएशन, टंडवा का समर्थन भी मिला था। आंदोलन के दौरान एसोसिएशन से जुड़े हाइवा मालिकों द्वारा कोयला ढुलाई में लगे वाहनों को खड़ा कर एनटीपीसी को कोयला आपूर्ति प्रभावित किए जाने की भी बात सामने आई। सूत्रों के मुताबिक करीब एक सप्ताह तक कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने से एनटीपीसी की उत्पादन व्यवस्था पर भी दबाव की स्थिति बनी थी।

बाद में एसोसिएशन के अध्यक्ष की ओर से पत्र जारी कर आंदोलन से समर्थन वापस लेने की बात कही गई। पत्र में कथित तौर पर यह स्पष्ट किया गया कि उन्हें गलत तरीके से टिप-टेलर रोकने का जिम्मेदार बताया जा रहा है। और उनका उद्देश्य टिप-टेलर का परिचालन रोकना नहीं है। एक तरफ समर्थन से दूरी, दूसरी तरफ कोयला ढुलाई रोकने की चेतावनी? मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि एसोसिएशन का टिप-टेलर रोकने से कोई संबंध नहीं है, तो फिर टिप-टेलर के परिचालन को लेकर विवाद की स्थिति क्यों बनी हुई है?

सूत्रों का दावा है कि एनटीपीसी में एसोसिएशन और फ्लाई ऐश एजेंसियों के अधिकृत प्रतिनिधियों के बीच वार्ता भी हुई थी। वार्ता में 16-चक्का हाइवा के परिचालन को लेकर सहमति बनने की बात सामने आई, लेकिन एसोसिएशन की ओर से निर्धारित रेट कॉन्ट्रैक्ट से करीब 10 प्रतिशत अधिक भाड़े की मांग किए जाने की चर्चा भी है। दूसरी ओर, जब टिप-टेलर चलाने को लेकर बातचीत हुई तो कथित तौर पर यह कहा गया कि टिप-टेलर का परिचालन शुरू हुआ तो एनटीपीसी में कोयला ढुलाई बंद कर दी जाएगी। यही विरोधाभास अब पूरे मामले को और गंभीर बना रहा है।

जिला प्रशासन और एनटीपीसी के सामने कई सवाल

बताया जाता है कि जिला प्रशासन चतरा हाइवा छोड़ो आंदोलन और विस्थापित हाइवा एसोसिएशन के बीच हुई वार्ता में टिप-टेलर के अत्यधिक परिचालन पर नियंत्रण रखने को लेकर सहमति बनी थी। ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि सहमति के बावजूद परिवहन व्यवस्था को लेकर टकराव की स्थिति क्यों पैदा हुई? क्या मामला वास्तव में स्थानीय वाहन मालिकों के हित और रोजगार से जुड़ा है या फिर परिवहन दर और परिचालन नियंत्रण को लेकर खींचतान बढ़ रही है? यदि किसी संगठन या व्यक्ति द्वारा एनटीपीसी की कोयला आपूर्ति रोकने की धमकी दी गई है, तो इसकी प्रशासनिक स्तर पर जांच होना जरूरी है।

बिजली उत्पादन रोकने की बात कितनी सच?

फ्लाई ऐश डाइक भरने की स्थिति में बिजली उत्पादन प्रभावित होने का दावा गंभीर है, लेकिन इस दावे की पुष्टि एनटीपीसी के आधिकारिक आंकड़ों से होना आवश्यक है। एनटीपीसी को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि वर्तमान में ऐश डाइक की कितनी क्षमता शेष है, प्रतिदिन कितनी फ्लाई ऐश निकलती है और ढुलाई बाधित रहने पर संयंत्र के संचालन पर कितना प्रभाव पड़ सकता है। क्योंकि मामला सिर्फ हाइवा या टिप-टेलर के परिचालन का नहीं है। मामला देश के एक बड़े बिजली संयंत्र के निर्बाध संचालन, हजारों लोगों की रोजी-रोटी और औद्योगिक व्यवस्था से जुड़ा है।

अब सवाल जिला प्रशासन और एनटीपीसी दोनों से है—यदि परिवहन व्यवस्था के विवाद के कारण बिजली उत्पादन जैसी आवश्यक सेवा पर संकट की स्थिति बनती है, तो जिम्मेदारी तय कौन करेगा। वहीं देशद्रोह या रंगदारी जैसे गंभीर शब्दों का इस्तेमाल करने के बजाय संबंधित आरोपों की तथ्यात्मक जांच और प्रमाण के आधार पर कार्रवाई ही उचित होगी। यदि किसी पक्ष पर आपूर्ति रोकने, दबाव बनाने या अवैध वसूली का आरोप है तो प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

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