गोरखा जवानों ने धूमधाम से निकाली फूलपाती शोभायात्रा, फायरिंग कर दी मां दुर्गा को सलामी

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Eksandeshlive Desk

रांची: नवरात्र की महासप्तमी पर शुक्रवार को रांची के डोरंडा स्थित झारखंड सशस्त्र पुलिस-1 (जैप-1) परिसर में पारंपरिक फूलपाती शोभायात्रा निकाली गई। वर्षों पुरानी इस परंपरा में गोरखा जवानों के परिवार बड़ी संख्या में शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा में सजे महिला, पुरुष और बच्चे लोकगीतों तथा नृत्य के साथ शोभायात्रा में शामिल हुए। इस दौरान गोरखा समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था की झलक देखने को मिली। जैप-1 परिसर स्थित दुर्गा मंदिर में सुबह से ही उत्साह का माहौल रहा। विधि-विधान से प्रकृति की पूजा-अर्चना की गई। परंपरा के अनुसार गोरखा जवानों ने फायरिंग कर मां दुर्गा को सलामी दी। धार्मिक अनुष्ठान के साथ सैन्य परंपरा और अनुशासन का अनूठा संगम देखने को मिला।

जैप-1 परिसर में दुर्गा पूजा की शुरुआत वर्ष 1880 में हुई थी। तब से यहां गोरखा समुदाय की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शक्ति पूजा और फूलपाती शोभायात्रा निकालने की परंपरा चली आ रही है। हर साल महासप्तमी के अवसर पर इसका आयोजन किया जाता है। इस परंपरा की खास विशेषता यह है कि यहां मां दुर्गा की प्रतिमा के बजाय कलश को देवी का स्वरूप मानकर पूजा-अर्चना की जाती है। फूलपाती अनुष्ठान के तहत नौ प्रकार की पवित्र वनस्पतियों की पूजा की जाती है। इनमें केला, गन्ना, बेलपत्र और हल्दी सहित अन्य पौधों की पत्तियां और टहनियां शामिल होती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन्हें देवी शक्ति के विभिन्न स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है। विधि-विधान से पूजा के बाद फूलपाती को मंदिर के पूजा स्थल तक लाया जाता है। इस आयोजन की एक प्रमुख विशेषता गोरखा जवानों की ओर से दी जाने वाली सैन्य सलामी है। जवानों ने परंपरा के अनुसार फायरिंग कर मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। गोरखा समुदाय में मां दुर्गा को शक्ति की देवी के रूप में पूजा जाता है। इस अवसर पर जवान अपने परिवार और देश की रक्षा की कामना करते हैं। शस्त्र पूजा भी इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

शोभायात्रा में गोरखा जवानों के परिवारों की भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया। पारंपरिक गीत-संगीत, लोकनृत्य और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच समुदाय के लोगों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया। रांची में फूलपाती शोभायात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गोरखा समुदाय के लोगों के एकजुट होने और अपनी ऐतिहासिक परंपराओं को सहेजने का अवसर भी है। आमतौर पर दुर्गा पूजा में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है, लेकिन जैप-1 परिसर में कलश को देवी का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है। नवरात्र के दौरान यहां पूरे विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।

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