राहुल दुबे गैंग के नाम से धमकी ने खोली अवैध कारोबार की परतें
सोशल मीडिया पोस्ट में अवैध कोयला कारोबार को लेकर प्रशासन को भी चुनौती
हजारीबाग। झारखंड में कोयला कारोबार से जुड़े लोगों के बीच दहशत का माहौल बनता जा रहा है। हजारीबाग से शुरू हुई गोलीबारी व धमकियों की चर्चा अब राजधानी रांची तक पहुंच गई है। पहले हजारीबाग के मटवारी स्थित होटल एके इंटरनेशनल में फायरिंग हुई फािर रांची के कांके रोड स्थित प्रेम नगर में कोयला कारोबारी संजय करमाली के घर को निशाना बनाकर पांच राउंड गोलियां चलाई गईं। इन दोनों घटनाओं के बीच सोशल मीडिया पर राहुल दुबे गैंग के नाम से सामने आई धमकी भरे पोस्ट ने मामले को और गंभीर बना दिया है। मामला अब केवल दो अलग-अलग गोलीबारी की घटनाओं तक सीमित नहीं दिख रहा। सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट में कोयला कारोबारियों व ट्रांसपोर्टरों को धमकी देने के साथ अवैध कोयला कारोबार का भी जिक्र किया गया है। पोस्ट में प्रशासन से अवैध गतिविधियों की जांच कराने की बात भी कही गई है। शुक्रवार की अहले सुबह कांके रोड के प्रेम नगर में बाइक सवार नकाबपोश अपराधियों ने संजय करमाली के नए मकान के बाहर पहुंचकर ताबड़तोड़ पांच राउंड फायरिंग की। अपराधियों ने घर की बाउंड्री व दरवाजों को निशाना बनाया। अचानक गोलियों की आवाज से परिवार के लोग सहम गए। वारदात के बाद अपराधी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। घटना के बाद रांची पुलिस जांच में जुटी है। मुख्यालय डीएसपी अमर कुमार पांडेय के नेतृत्व में पुलिस की टीम आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, ताकि अपराधियों की पहचान हो सके। इससे पहले हजारीबाग के मटवारी स्थित होटल एके इंटरनेशनल में गुरुवार रात गोलीबारी हुई। घटना के बाद सोशल मीडिया पर राहुल दुबे गैंग के नाम से एक पोस्ट सामने आई, जिसमें होटल में हुई फायरिंग की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया। पोस्ट में कोयला कारोबारियों व ट्रांसपोर्टरों को चेतावनी भी दी गई थी। 29 अक्टूबर की तारीख वाली एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में रांची की घटना का जिक्र करते हुए हजारीबाग के कोयला कारोबार से जुड़े लोगों को निशाना बनाया गया है। पोस्ट में संजय करमाली, सोनाराम मांझी तथा अन्य लोगों के नामों का उल्लेख करते हुए अवैध कोयला कारोबार व कथित सिंडिकेट पर सवाल उठाए गए हैं। पोस्ट में प्रशासन से इन गतिविधियों की जांच और कार्रवाई की मांग भी की गई है। हजारीबाग में कोयले के अवैध खनन, भंडारण व परिवहन को रोकने के लिए समय-समय पर सीआईएसएफ तथा पुलिस की ओर से कार्रवाई की जाती रही है। विभिन्न थाना क्षेत्रों में छापेमारी, अवैध कोयले की जब्ती और वाहनों पर कार्रवाई की खबरें भी सामने आती रही हैं। पुलिस प्रशासन की ओर से अवैध कारोबार पर रोक लगाने के दावे भी किए जाते हैं। लेकिन अब सवाल यह है कि अगर कार्रवाई लगातार हो रही है और अवैध कोयले का कारोबार बंद कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, तो फिर हजारीबाग, बड़कागांव, चरही व आसपास के क्षेत्रों में इस कारोबार को लेकर ऐसी धमकियां क्यों सामने आ रही हैं। क्या अवैध कोयला कारोबार पूरी तरह बंद हो चुका है? क्या कोयले की चोरी, अवैध उठाव और परिवहन पर वास्तव में रोक लगी है। क्या कार्रवाई केवल छापेमारी व जब्ती तक सीमित है या इस पूरे नेटवर्क के संचालकों तथा आर्थिक स्रोतों तक भी पुलिस पहुंच रही है। हजारीबाग के बड़कागांव, चरही, केरेडारी व आसपास के कोयला प्रभावित क्षेत्रों में अवैध कारोबार पर नियंत्रण की जिम्मेदारी संबंधित पुलिस थानों, जिला पुलिस तथा अन्य संबंधित एजेंसियों की भी है। ऐसे में केवल छोटी-मोटी जब्ती की कार्रवाई से आगे बढ़कर यह पता लगाना जरूरी है कि अवैध कोयले का स्रोत क्या है, उसे कौन उठवा रहा है, कहां भंडारण हो रहा है और किन रास्तों से उसका परिवहन किया जा रहा है। हजारीबाग से रांची तक सामने आ रही घटनाएं बताती हैं कि कोयला कारोबार से जुड़े विवाद व धमकियों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। किसी भी गिरोह द्वारा गोलीबारी की जिम्मेदारी लेने का दावा करना, कारोबारियों को धमकाना और प्रशासन को चुनौती देना कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है। पुलिस को गोलीबारी की घटनाओं की जांच के साथ-साथ सोशल मीडिया पोस्ट के स्रोत, उसकी प्रामाणिकता, कथित गिरोह के नेटवर्क व अवैध कोयला कारोबार से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल करनी चाहिए। साथ ही, जिन कारोबारियों के नाम पोस्ट में लिए गए हैं, उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को भी जांच के बिना सच नहीं माना जा सकता। अब निगाहें रांची तथा हजारीबाग पुलिस के अगले कदम पर हैं। सवाल सिर्फ अपराधियों की गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि उस कथित नेटवर्क की वास्तविकता सामने लाने का भी है, जिसके नाम पर कारोबारियों को धमकियां दी जा रही हैं। आखिर अवैध कोयला कारोबार पर कार्रवाई जमीन पर होगी या फिर गोलियों की आवाज के बाद एक बार फिर जांच व दावों का सिलसिला शुरू होगा।
