Eksandeshlive Desk
कोलकाता: चुनाव आयोग के भीतर मचे घमासान की खबरों के बीच, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कथित मतभेदों के बीच ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला है। अभिषेक ने चुनाव पर्यवेक्षकों के एक कथित व्हाट्सऐप ग्रुप के अप्रैल के स्क्रीनशॉट साझा करते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची से करीब 30 लाख नाम हटाने की सुनियोजित प्रक्रिया चलाई गई, जिसका कथित उद्देश्य एक राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाना था। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर के आरोपों को खारिज किया है।
अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सामने आए कथित संदेशों और दस्तावेजों को दबाया या नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने और मामले की अदालत की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। उन्हाेंने उच्चतम न्यायालय की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब चुनाव आयोग के भीतर एसआईआर से जुड़े फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि निर्णय प्रक्रिया में अलग-अलग विचार सामने आना संस्थागत विवेचना का हिस्सा है। पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नामों को लेकर भी विवाद हुआ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 90 लाख नामों को हटाया गया, जबकि लगभग 60 लाख मतदाताओं को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के आधार पर जांच के दायरे में रखा गया। इनमें से करीब 32.68 लाख को पात्र पाया गया और लगभग 27.16 लाख नाम हटाने का आदेश दिया गया।
अभिषेक बनर्जी का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया का इस्तेमाल विपक्षी समर्थकों को प्रभावित करने के लिए किया गया। उन्होंने पश्चिम बंगाल के अलावा हरियाणा और बिहार में भी मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, यह दावा कि नाम हटाने की प्रक्रिया किसी विशेष राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की गई थी, अभी स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं हुआ है। सांसद ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, नए फॉर्म में बदलाव तथा डेटाबेस से जुड़े फैसलों को लेकर सामने आए मतभेद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं। अभिषेक बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तत्काल कार्रवाई और अदालत की निगरानी में जांच की मांग दोहराई है। इससे पहले भी वह एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं। इस विवाद के बीच विपक्षी दलों के कई नेताओं ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे या हटाने की मांग की है। वहीं, चुनाव आयोग पर लगे आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ रहा है। भाजपा ने मतदाता सूची में बदलाव को लेकर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। इस पूरे मामले में आरोपों, चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण और उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के बीच अंतर को लेकर आगे भी कानूनी और राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।
