Eksandeshlive Desk
काठमांडू: सरकार की ओर से गठित टीम ने ‘रसुवा-भोटेकोशी बाढ़ 2083: त्वरित क्षति एवं आवश्यकता आकलन’ रिपोर्ट में बताया गया है कि नेपाल में बाढ़ ने बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। बाढ़ से अकेले बुनियादी ढांचे को 172.34 अरब रुपये का नुकसान हुआ है। क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए करीब 473.57 अरब नेपाली रुपये की जरूरत होगी। रिपोर्ट के मुताबिक ऊर्जा क्षेत्र की जलविद्युत परियोजनाओं और ट्रांसमिशन लाइनों को सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। इस क्षेत्र में 134.69 अरब रुपये का नुकसान हुआ है और इसके पुनर्निर्माण के लिए करीब 390 अरब रुपये की जरूरत अनुमानित है। नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे को करीब 56 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। बाढ़ से सड़कों को करीब 22 अरब रुपये का नुकसान हुआ, जबकि इनके पुनर्निर्माण के लिए 55.18 अरब रुपये से अधिक की जरूरत होगी। इसी तरह पुलों को 11.35 अरब रुपये का नुकसान हुआ है और इनके पुनर्निर्माण में करीब 18.06 अरब रुपये खर्च होने का अनुमान है।
पुनर्निर्माण के लिए करीब 723.31 अरब रुपये की जरूरत होगी: दूरसंचार क्षेत्र में करीब 62 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और इसके पुनर्निर्माण के लिए लगभग 1 अरब रुपये की जरूरत होगी। बाढ़ से जलापूर्ति और स्वच्छता से जुड़े बुनियादी ढांचे को 1.38 अरब रुपये का नुकसान हुआ, जबकि सिंचाई संरचनाओं को 1.64 अरब रुपये का नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा बाढ़ में निजी और सरकारी मकानों, स्कूलों, स्वास्थ्य चौकियों और सांस्कृतिक संरचनाओं को करीब 67.84 अरब रुपये का नुकसान हुआ है। इन सुविधाओं के पुनर्निर्माण के लिए लगभग 100 अरब रुपये की जरूरत अनुमानित की गई है। सरकार के आकलन के अनुसार बाढ़ से हुआ कुल भौतिक नुकसान 274.48 अरब नेपाली रुपये है। सभी क्षतिग्रस्त संरचनाओं के पुनर्निर्माण के लिए करीब 723.31 अरब रुपये की जरूरत होगी। रिपोर्ट के मुताबिक कुल पुनर्निर्माण राशि में से करीब 9 अरब रुपये पहले छह महीनों के तत्काल राहत और पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम के लिए आवश्यक होंगे। बाकी राशि का इस्तेमाल दीर्घकालीन पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए किया जाएगा।
आपदा में माता-पिता खोने वाले बच्चों के लिए नेपाल सरकार ने बनाई विशेष योजना: आपदा के कारण माता-पिता को खोने वाले, परिवार से अलग हुए तथा विशेष संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के बचपन और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नेपाल सरकार ने ‘शिशु स्याहार योजना’ लागू की है। राष्ट्रीय बाल दिवस के अवसर पर सोमवार को महिला, बालबालिका एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय ने ‘बचपन की रक्षा: भविष्य की सुरक्षा’ नारे के साथ इस योजना को आगे बढ़ाया है। योजना के तहत आपदा के बाद तत्काल संरक्षण को दीर्घकालीन देखभाल, पुनर्वास और पारिवारिक पुनर्मिलन से जोड़ा गया है। महिला बाल बालिका तथा सामाजिक सुरक्षा मंत्री सीता बादी ने कहा कि आपदा बच्चों से उनका घर, परिवार या अभिभावक छीन सकती है, लेकिन उनके बचपन और भविष्य की सुरक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि योजना के तहत बाढ़ प्रभावित, माता-पिता को खोने वाले, परिवार से अलग हुए और विशेष संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान कर उनके सर्वोत्तम हित के आधार पर संरक्षण एवं देखभाल की व्यवस्था की जाएगी। मंत्रालय के अनुसार बच्चों को सुरक्षित आवास, भोजन, स्वास्थ्य उपचार, मनोसामाजिक सहयोग, परिवार की तलाश और पारिवारिक पुनर्मिलन जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जिन बच्चों को दीर्घकालीन संरक्षण की आवश्यकता होगी, उनकी व्यक्तिगत स्थिति और सर्वोत्तम हित का मूल्यांकन कर उचित देखभाल एवं संरक्षण की व्यवस्था की जाएगी।
प्रभावित बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता: योजना के शुरुआती कार्यान्वयन के तहत ललितपुर में विशेष संरक्षण की आवश्यकता वाले बचाए गए बच्चों के लिए अस्थायी बाल संरक्षण सेवा केंद्र शुरू किया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की स्थिति की पहचान, विस्तृत आकलन और आवश्यक संरक्षण सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय के तंत्र को भी सक्रिय किया गया है। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ से बड़े पैमाने पर जन-धन की क्षति के बाद मंत्रालय ने प्रभावित बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। मंत्रालय ने कहा कि आपदा के बाद बच्चों के परिवार से अलग होने, असुरक्षित होने तथा हिंसा, शोषण और मानव तस्करी के खतरे को देखते हुए बाल संरक्षण तंत्र को और मजबूत किया जाएगा। मंत्री बादी ने कहा कि बाल विवाह, बाल श्रम, हिंसा, दुर्व्यवहार, तस्करी और ओसारपसार के साथ-साथ साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शोषण, डिजिटल लत, ऑनलाइन ठगी और व्यक्तिगत गोपनीयता के दुरुपयोग जैसे जोखिमों से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए राज्य, परिवार, स्कूल और समुदाय के बीच प्रभावी समन्वय जरूरी है। सरकार ने कहा है कि बाल संरक्षण को केवल बचाव और राहत तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोसामाजिक सहयोग, पारिवारिक पुनर्मिलन और पुनर्वास तक जोड़कर एक एकीकृत बाल संरक्षण प्रणाली के रूप में विकसित किया जाएगा।
