ओमान दौरे के बाद फिर इस्लामाबाद पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची, क्षेत्रीय कूटनीति पर जोर

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Eksandeshlive Desk

इस्लामाबाद : अब्बास अराघची एक बार फिर इस्लामाबाद पहुंच गए हैं, जहां वे क्षेत्रीय कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तानी नेतृत्व के साथ अहम बातचीत करेंगे। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, अराघची हाल ही में मस्कट का दौरा पूरा कर पाकिस्तान पहुंचे। इस्लामाबाद के बाहरी इलाके में स्थित नूर खान एयरबेस पर उनके आगमन पर पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी और पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रेजा अमीरी मोगदाम ने उनका स्वागत किया। अराघची ने अपने हालिया दौरे को “बहुत फायदेमंद” बताते हुए कहा कि उन्होंने ईरान के दृष्टिकोण को साझा किया, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में संघर्ष और विशेष रूप से ईरान से जुड़े तनाव को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए एक व्यवहारिक ढांचा तैयार करना है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका कूटनीतिक प्रयासों को लेकर कितना गंभीर है। सूत्रों के अनुसार, अराघची इस यात्रा के दौरान पाकिस्तान के अधिकारियों के साथ एक और दौर की क्षेत्रीय परामर्श बैठक करेंगे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में सुरक्षा और राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्लामाबाद में संक्षिप्त ठहराव के बाद अराघची मॉस्को के लिए रवाना होंगे, जहां वे रूस के नेताओं के साथ आगे की रणनीतिक चर्चा करेंगे। इससे स्पष्ट है कि ईरान क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर बहुपक्षीय कूटनीति को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहा है।

होर्मुज में शिपिंग बहाली पर ट्रम्प–स्टार्मर की बातचीत, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर चिंता जताई

वॉशिंगटन/लंदन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बीच हाल ही में हुई फोन वार्ता में होर्मुज क्षेत्र में शिपिंग गतिविधियों को जल्द बहाल करने पर जोर दिया गया। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित रहती है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। वार्ता के दौरान ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता और समुद्री सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर पड़ना तय है। ब्रिटेन की ओर से विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि शिपिंग में व्यवधान का असर आम लोगों पर भी पड़ेगा। बढ़ती ईंधन कीमतों के चलते महंगाई दर में उछाल आ सकता है, जिससे रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी हो जाएंगी। प्रधानमंत्री स्टार्मर ने बताया कि उनका देश फ्रांस के साथ मिलकर समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाने और शिपिंग को सामान्य स्थिति में लाने के प्रयास कर रहा है। इस बातचीत को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब वैश्विक बाजार पहले से ही अस्थिरता के दौर से गुजर रहे हैं। दो प्रमुख शक्तियों के बीच इस तरह का समन्वय संकट को कम करने और व्यापारिक गतिविधियों को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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