संस्कृत को केवल ग्रन्थों और कक्षाओं तक सीमित न रखकर व्यवहार की भाषा बनाने की आवश्यकता है: डॉ. दीपचंद राम कश्यप

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भव्य शोभायात्रा के साथ संस्कृत सप्ताह का शुभारंभ

Eksandeshlive Desk

राँची: संस्कृतभारती, राँची तथा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, राँची के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को भव्य संस्कृत शोभायात्रा के साथ संस्कृत सप्ताह का शुभारंभ किया गया। संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार एवं जनसामान्य में इसके प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से आयोजित इस शोभायात्रा में लगभग 150 संस्कृतप्रेमियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

शोभायात्रा प्रातः 7 बजे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से प्रारम्भ हुई। मोरहाबादी मैदान की परिक्रमा करते हुए यह पुनः विश्वविद्यालय परिसर पहुँची। यात्रा के दौरान प्रतिभागियों ने ‘जयतु जयतु संस्कृतभाषा’, ‘अस्माकं भाषा संस्कृतभाषा’ आदि उद्घोषों के माध्यम से संस्कृत के प्रति अपने अनुराग और उत्साह को अभिव्यक्त किया। संस्कृत के जयघोष से पूरा मोरहाबादी क्षेत्र संस्कृतमय हो उठा।
ज्ञातव्य है कि प्रतिवर्ष श्रावण पूर्णिमा अर्थात् संस्कृत दिवस के तीन दिन पूर्व से तीन दिन पश्चात् तक संस्कृत सप्ताह मनाया जाता है। इस वर्ष संस्कृत सप्ताह 25 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक मनाया जा रहा है। इसी क्रम में संस्कृतभारती एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में संस्कृत शोभायात्रा का आयोजन किया गया।

शोभायात्रा के उपरान्त सभी संस्कृतानुरागी विश्वविद्यालय परिसर में एकत्र हुए, जहाँ लघु गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी को संबोधित करते हुए संस्कृतभारती के प्रांत उपाध्यक्ष डॉ. दीपचंद राम कश्यप ने कहा कि संस्कृत विश्व की प्राचीनतम, सुसंस्कृत एवं वैज्ञानिक भाषाओं में से एक है। इसमें भारतीय ज्ञान-विज्ञान, दर्शन, साहित्य और संस्कृति की समृद्ध विरासत सुरक्षित है। संस्कृत को केवल ग्रन्थों और कक्षाओं तक सीमित न रखकर व्यवहार की भाषा बनाने की आवश्यकता है। राँची महानगर अध्यक्ष डॉ. श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि संस्कृत भारतीय संस्कृति, संस्कार और ज्ञान-परम्परा की प्रमुख संवाहिका है। संस्कृत का संवर्धन हमारी सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत का संरक्षण है तथा ऐसे आयोजन संस्कृत को जन-जन तक पहुँचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रांत मन्त्री पृथ्वीराज सिंह ने कहा कि संस्कृतभारती का उद्देश्य संस्कृत को जन-जन की व्यवहार भाषा बनाना है। संस्कृत सप्ताह के माध्यम से समाज, विशेषकर युवाओं में संस्कृत के प्रति अनुराग एवं जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रांत शिक्षण प्रमुख डॉ. चंद्रमाधव सिंह ने कहा कि संस्कृत सरल, सरस एवं सहज भाषा है। सम्भाषण वर्गों एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से सामान्य जन भी सरलता से संस्कृत बोलना सीख सकते हैं। उन्होंने युवाओं से संस्कृत सम्भाषण को अपने दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

विश्वविद्यालयीय कार्य प्रमुख डॉ. जगदंबा प्रसाद ने कहा कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के प्रमुख केन्द्र हैं। विद्यार्थियों में संस्कृत के प्रति रुचि उत्पन्न कर उन्हें भारतीय ज्ञान-परम्परा से जोड़ना समय की आवश्यकता है। प्रांत साहित्य प्रमुख रमेश कुमार ने कहा कि संस्कृत साहित्य ज्ञान, दर्शन, संस्कृति और जीवन-मूल्यों का अक्षय भण्डार है। इस समृद्ध साहित्यिक एवं ज्ञान-परम्परा को सरल और रुचिकर रूप में नई पीढ़ी तक पहुँचाना आवश्यक है।

विभाग संयोजक डॉ. राहुल कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि शोभायात्रा में बड़ी संख्या में संस्कृतप्रेमियों की सहभागिता संस्कृत के प्रति बढ़ते अनुराग का परिचायक है। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले विश्वविद्यालय परिवार, संस्कृतभारती के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों एवं सभी संस्कृतानुरागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मनीषा बोदरा, प्रवीण कुमार, माधुरी, आशीष कुमार, मनीष, गरिमा, सुरेंद्र, सचिन, प्रतिमा, पल्लवी सहित बड़ी संख्या में संस्कृतप्रेमी, विद्यार्थी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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