सीमा सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास के बिना भारत या पश्चिम बंगाल सुरक्षित नहीं : अमित शाह

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Eksandeshlive Desk

सिलीगुड़ी: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को सिलीगुड़ी दौरे के दौरान देश की सीमा सुरक्षा और विशेष रूप से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा से जुड़ी जो भी आवश्यकताएं सामने आई हैं, उन्हें पूरा करने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अमित शाह ने सिलीगुड़ी में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की कई विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने एसएसबी के जवानों से मुलाकात की और उनसे बातचीत भी की। कार्यक्रम में बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि यह पहला मौका था जब उन्हें एसएसबी के किसी कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला। उन्होंने एसएसबी को देश की संप्रभुता और सुरक्षा का अटूट प्रहरी बताया। कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्री ने सीमा सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए जमीन उपलब्ध कराने में देरी को लेकर पूर्ववर्ती राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार वर्ष 2024 से 1,129 एकड़ जमीन की मांग कर रही थी, लेकिन बार-बार अनुरोध के बावजूद जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री को आमंत्रित किए जाने के बावजूद उन्होंने कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। इसके विपरीत अमित शाह ने वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के कार्यकाल में प्रशासनिक स्तर पर सहयोग मिलने का दावा किया। उन्होंने कहा कि अब ऐसी व्यवस्था बनाई गई है, जिसमें प्रशासनिक मंजूरी पहले मिलती है और पत्र बाद में आता है। कार्यक्रम में उन्होंने सिलीगुड़ी में करीब 80 एकड़ जमीन पर नए प्रशासनिक भवन के निर्माण की भी घोषणा की। गृह मंत्री ने कहा कि देश की सीमा सुरक्षा के साथ बुनियादी ढांचे को मजबूत करना भी केंद्र सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने लाल किले पर आयोजित भव्य वंदे मातरम् समारोह का जिक्र करते हुए कहा कि देश की समग्र सुरक्षा, आधारभूत संरचना और सीमाओं को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार हर आवश्यक कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय के माध्यम से आने वाले दिनों में देश की सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा।

पूरा ‘वंदे मातरम्’ गाया जाना इस बार स्वतंत्रता दिवस को खास बना गया: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि देश की आजादी और विभाजन के बाद लंबे समय तक कुछ लोगों ने ‘वंदे मातरम्’ को पूरे मन से स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि संसद में इस गीत को गाया जाता था और सभी लोग सम्मान में खड़े होते थे, लेकिन आजादी के बाद भी इसका पूरा संस्करण नहीं गाया जाना उन्हें हमेशा खलता रहा। अमित शाह ने यह बात दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के अधिकारियों और जवानों को संबोधित करते हुए कही। इस दौरान उन्होंने जवानों से संवाद किया और सिलीगुड़ी में कई परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस का समारोह उनके लिए खास रहा। शाह ने बताया कि 2014 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं, वह वहां मौजूद रहे हैं, लेकिन इस बार 80वां स्वतंत्रता दिवस समारोह अलग रहा, क्योंकि पहली बार पूरा ‘वंदे मातरम्’ गाया गया।गृह मंत्री ने ‘वंदे मातरम्’ की रचना करने वाले बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को याद करते हुए कहा कि इस रचना ने न केवल स्वतंत्रता आंदोलन को गति दी, बल्कि स्वतंत्र भारत की कल्पना को भी दिशा दी। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अपनी रचना के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया कि स्वतंत्र भारत कैसा होना चाहिए। सीमा सुरक्षा और सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन आवंटन के मुद्दे पर अमित शाह ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पद संभालने के बाद सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन आवंटन का लंबे समय से लंबित काम तेजी से आगे बढ़ा है। राज्य सरकार अब तक इसके लिए 1,129 एकड़ जमीन आवंटित कर चुकी है। अमित शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई बार उनसे सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह किया था, लेकिन उनकी अपील पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य से भाजपा के लिए नहीं, बल्कि देश की सीमा और नागरिकों की सुरक्षा के लिए जमीन मांग रही थी। इस अवसर पर अमित शाह ने प्रसिद्ध शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि भी दी। उन्होंने बिस्मिल्लाह खान से जुड़ा एक प्रसंग साझा करते हुए कहा कि जब उनसे पूछा गया था कि संसद, राष्ट्रपतियों के सामने और बड़े आयोजनों में शहनाई बजाने के बाद उन्हें सबसे अधिक खुशी कहां मिलती है, तो उन्होंने गंगा के किनारे सुबह काशी विश्वनाथ की मौजूदगी में शहनाई बजाने को सबसे बड़ा आनंद बताया था।

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