Eksandeshlive Desk
रांची : भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान रांची में 23 अप्रैल को दोपहर 2:00 बजे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के विशेष मॉनिटर प्रो. कन्हैया त्रिपाठी का आगमन हुआ। यह दौरा झारखंड में उनके आधिकारिक भ्रमण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। इस दौरे का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में मानवाधिकार शिक्षा एवं लैंगिक समानता की वर्तमान स्थिति का आकलन एवं समीक्षा करना था। अपने दौरे के दौरान प्रो. त्रिपाठी ने संस्थान के निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव, अधिकारियों, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों के साथ विस्तृत संवाद किया। इस दौरान मानवाधिकार जागरूकता एवं लैंगिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देने हेतु वर्तमान व्यवस्थाओं, चुनौतियों एवं संभावनाओं पर चर्चा की गई।
दौरे का प्रमुख आकर्षण प्रो. त्रिपाठी के महत्वपूर्ण सुझाव रहे, जिनमें मानवाधिकार जागरूकता एवं छात्र कल्याण को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान रांची इन सुझावों को सक्षम प्राधिकारी की आवश्यक स्वीकृतियों के उपरांत निकट भविष्य में लागू करने की दिशा में कार्य करेगा। सुझाव इस प्रकार हैं : संस्थान में एक समर्पित मानवाधिकार प्रकोष्ठ की स्थापना। परिसर में लैंगिक संवेदनशीलता (Gender Sensitization) से संबंधित पहल को सुदृढ़ करना। छात्र कल्याण हेतु एक समर्पित एप्लिकेशन विकसित करना, जिसके माध्यम से छात्र सीधे संबंधित अधिकारियों एवं प्राधिकरणों तक अपनी समस्याएं एवं सुझाव पहुंचा सकें। जागरूकता एवं संवाद को बढ़ावा देने के लिए मानवाधिकार एवं लैंगिक समानता पर कार्यशाला का आयोजन। मानवाधिकार विषय पर ओपन इलेक्टिव (Open Elective) प्रारंभ करना, जिसे सीनेट एवं बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (BoG) की स्वीकृति के पश्चात डिग्री कोर्स/ प्रमाणपत्र कार्यक्रम के रूप में भी संचालित किया जा सकता है।
भ्रमण के दौरान प्रो. त्रिपाठी ने संस्थान परिसर में वृक्षारोपण भी किया, जो पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने संस्थान में विद्यार्थियों के कल्याण हेतु सक्रिय विभिन्न समितियों के कार्यों की समीक्षा की, जिनमें आंतरिक शिकायत समिति (ICC), एंटी-रैगिंग समिति एवं एंटी-रैगिंग स्क्वाड, छात्र अनुशासन समिति, अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ, प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट समिति तथा अनुसंधान सलाहकार समिति शामिल हैं। उन्होंने इन समितियों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ये छात्र हितों की सुरक्षा एवं समावेशी वातावरण निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
