Eksandeshlive Desk
रांची : झारखंड विधानसभा स्थित पुस्तकालय कक्ष में शुक्रवार को “संसदीय प्रक्रिया एवं संवैधानिक प्रावधानों के प्रति समझ को सुदृढ़ करना तथा पुस्तकालय संसाधनो का प्रभावी उपयोग” के निमित्त एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो के संबोधन से शुरू हुई। झारखंड विधानसभा सभा के प्रभारी सचिव रंजीत कुमार एवं सभा सचिवालय के पदाधिकारी एवं कर्मी इस कार्यशाला में उपस्थिति रहे।
रबीन्द्र नाथ महतो ने अपने संबोधन में कहा कि भारत एक संसदीय लोकतंत्र है, जिसमें विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के अपने अपने दायित्व हैं। दायित्वों के निर्वाह करने के लिए उसकी सीमाओं और परिसीमाओं को जानना बहुत ज़रूरी है। सभा सचिवालय के पदाधिकारी एवं कर्मी, सदस्यों को उनके कार्यों के निपटारा करने में सहयोग करते हैं एवं विधायी तथा संवैधानिक पक्षों को उनके समक्ष रखते हैं। इसलिए यह काफ़ी ज़रूरी है कि विधानसभा सचिवालय के कर्मी एवं पदाधिकारी हर वे विषयों से अवगत रहे हैं जिसके पालन होने पर विधायी परंपराओं एवं विधान सभा की गरिमा अक्षुण्ण बनी रहे तथा कर्मियों एवं पदाधिकारियों के कार्य दक्षता से आसन को भी अपने कार्यों का निष्पादन करने में सहूलियत हो। उन्होंने कहा कि कर्मियों एवं पदाधिकारियों की कार्य करने की दक्षता सबसे पहले उनके आचरण से प्रतिबिंबित होती है। अध्यक्ष ने अपनी भावनाओं से अवगत कराते हुए कर्मियों पदाधिकारियों को यह भी बताया कि यह कार्यशाला पुस्तकालय कक्ष में इसलिए आयोजित करायी जा रही है कि आपमें पढ़ने और सीखने की आदत बनी रही।
अध्यक्ष के संबोधन के बाद कार्यशाला के प्रथम सत्र में विधान सभा का गठन, संवैधानिक प्रावधानों, मंत्रियों से संबंधित प्रावधान, संसदीय विशेषाधिकार, धन विधेयक एवं वार्षिक वित्तीय विवरण तथा बजट से संबंधित विभिन्न अनुच्छेदों तथा पुस्तकालय के संसाधनों को बेहतर से बेहतर और प्रभावी ढंग से उपयोग करने के संबंध में अध्यक्षीय कोषांग के पदाधिकारी ने प्रस्तुति रखी। कार्यशाला के द्वितीय सत्र में झारखंड विधानसभा के औपबंधिक कार्यक्रमों की कार्यसूची सूची, झारखंड विधानसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमों तथा निर्वाचित सदस्यों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान, राज्यपाल के अभिभाषण, सामान्य वाद विवाद इत्यादि विषयों पर झारखंड विधानसभा के विधायी शाखा से रोशन किड़ो, प्रशाखा पदाधिकारी ने कार्यशाला में प्रस्तुति दी।
