Eksandeshlive Desk
जबलपुर : भारत की न्यायपालिका को अब अस्पतालों की तरह 24 घंटे काम करने वाली व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना होगा। डिजिटल बदलावों के इस दौर में आम नागरिकों का भरोसा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। तकनीकी प्लेटफॉर्म ऐसे हों जिन्हें ग्रामीण और तकनीक से कम परिचित लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके लिए स्थानीय स्तर पर पैरालीगल वालंटियर्स तैयार किए जाने चाहिए, जो लोगों को डिजिटल न्याय प्रणाली से जोड़ सकें। यह बातें देश के उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने शनिवार को मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित एक राष्ट्रीय सेमिनार में कहीं। फ्रेगमेंटेशन ऑफ फ्यूजन एम्पावरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफार्म इंटीग्रेशन विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में उच्चतम एवं उच्च न्यायालय के कई न्यायाधीशों के साथ केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहे। इससे पूर्व नेताजी सुभाषचंद्र बोस कल्चरल एंड इन्फॉर्मेशन सेंटर में आयोजित सेमिनार में देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकान्त ने फ्रेगमेंटेशन ऑफ फ्यूजन एम्पावरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफार्म इंटीग्रेशन” का शुभारंभ किया। इस अवसर पर एनुअल रिपोर्ट : 2025 का भी विमोचन किया गया।
छोटे डिजिटल कदम भविष्य में बनेंगे बड़ी क्रांति : मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने नर्मदा नदी का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे अमरकंटक से निकलने वाली छोटी धारा आगे चलकर विशाल स्वरूप ले लेती है, उसी प्रकार न्याय व्यवस्था में किए जा रहे छोटे-छोटे तकनीकी सुधार आने वाले समय में व्यापक परिवर्तन का आधार बनेंगे। उन्होंने कहा कि हाल ही में शुरू किए गए डिजिटल प्लेटफॉर्म और एप न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाने में सहायक होंगे। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में पुलिस थाना, फॉरेंसिक लैब, मेडिकल सिस्टम, लीगल सेल, अदालत और जेल से संबंधित सूचनाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ने का प्रयास किया गया है। इसे अनूठी पहल बताते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य में इस मॉडल को देशभर में लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि न्यायिक प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को लेकर एक विशेष कमेटी गठित की गई है। यह समिति लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे और प्रक्रियाओं को अधिक सक्षम बनाने के उपायों पर काम कर रही है। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले समय में इस संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायपालिका तकनीक अपनाने के मामले में पहले से अग्रणी रही है। कोविड महामारी के दौरान भी अदालतों का कामकाज बाधित नहीं हुआ और भारत के डिजिटल न्याय मॉडल की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई। देश के मुख्य न्यायाधीश ने अपने अनुभव साझा करते हुए एक पुराने मामले का जिक्र किया, जिसमें जमानत आदेश समय पर जेल तक नहीं पहुंच पाने के कारण आरोपित लंबे समय तक बंद रहा। उन्होंने कहा कि नई डिजिटल प्रणाली लागू होने के बाद ऐसी स्थितियों से काफी हद तक बचा जा सकेगा और न्यायिक प्रक्रिया अधिक संवेदनशील एवं त्वरित बनेगी।
मध्य प्रदेश अब बनेगा डिजिटल न्याय मॉडल : केंद्रीय कानून मंत्री मेघवाल ने कहा कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की यह पहल साधारण नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले डिजिटल पुलिस नेटवर्क के उदाहरण के रूप में चंडीगढ़ का नाम लिया जाता था, लेकिन अब मध्य प्रदेश मिसाल बनेगा। उन्होंने विशेष रूप से साइन लैंग्वेज आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म की सराहना करते हुए कहा कि सुनने और बोलने में असमर्थ लोगों को भी न्याय प्रक्रिया से जोड़ने का यह प्रयास देश में अपनी तरह की अनोखी पहल है। उन्होंने उच्च न्यायालय प्रशासन को इसके लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि न्याय की चर्चा हो और सम्राट विक्रमादित्य का उल्लेख न हो, यह संभव नहीं। उन्होंने कहा कि विक्रमादित्य की न्याय परंपरा आज भी आदर्श मानी जाती है। विक्रम-बेताल की कहानियां केवल मनोरंजन नहीं बल्कि प्रशासन, नीति और न्याय से जुड़े गहरे संदेश देती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन को सरल बनाया है और लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने में न्यायपालिका की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। न्याय व्यवस्था में हो रहे तकनीकी नवाचार आम लोगों का विश्वास और मजबूत करेंगे।
