सरकारी दावों की खुली पोल: खंडहर भवन में बंद रहता है आंगनबाड़ी केंद्र

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By Mustaffa

मेसरा (रांची): ​झारखंड सरकार जहां एक तरफ नौनिहालों के बेहतर भविष्य और कुपोषण मुक्ति के बड़े-बड़े दावे कर रही है,वहीं रांची के ओरमांझी प्रखंड में जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। प्रखंड क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन में बरती जा रही घोर लापरवाही का सीधा खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। ​इसका सबसे चिंताजनक उदाहरण ईचादाग पंचायत के पंडाराटोली स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-515 में देखने को मिला। जर्जर और खंडहरनुमा भवन में संचालित होने वाला यह केंद्र अधिकांश दिनों बंद ही रहता है। इसके कारण क्षेत्र के गरीब और जरूरतमंद बच्चों को न तो नियमित रूप से पौष्टिक आहार मिल पा रहा है और न ही प्रारंभिक शिक्षा का लाभ। ​स्थानीय ग्रामीणों ने रोष जताते हुए बताया कि यह केंद्र शायद ही कभी नियमित रूप से खुलता है। महीने में कभी-कभार पोषाहार तैयार कर बच्चों को बुला लिया जाता है और केवल कागजी औपचारिकता (कोरम) पूरी कर दी जाती है। ग्रामीणों के अनुसार केंद्र में कुल 25 बच्चे नामांकित हैं। नियमित संचालन न होने के कारण ये मासूम दिनभर गली-मुहल्लों में भटकने और धूल फांकने को मजबूर हैं। ​ग्रामीणों ने इस अनियमितता की शिकायत कई बार उच्च अधिकारियों से की,लेकिन स्थिति ढाक के तीन पात रही। ​जब इस मामले की पड़ताल की गई तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। केंद्र बंद मिलने पर जब सेविका सुमन देवी के घर का रुख किया गया,तो वह अपने घर में भोजन बनाती मिलीं। जब उनसे केंद्र बंद होने का कारण पूछा गया,तो उन्होंने विभागीय कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठा दिए। सुमन देवी ने संबंधित रजिस्टर दिखाते हुए कहा,हमें बीएलओ का कार्य भी करना पड़ता है,जिसके कारण केंद्र का संचालन प्रभावित होता है। अभी घर का भोजन तैयार करने के बाद मुझे गांव में बीएलओ संबंधी कार्य के लिए ही जाना है। ​वहीं,दूसरी ओर केंद्र की सहायिका शांति देवी के बारे में पता चला कि वह अपने किसी रिश्तेदार के घर गई हुई हैं। सेविका के परिजनों ने भी दबी जुबान में विभागीय भुगतान में अनियमितता की बात स्वीकार की। आंगनबाड़ी केंद्रों की मॉनिटरिंग के लिए तैनात अधिकारियों का रवैया बेहद उदासीन है। जब इस संबंध में जवाब मांगा गया तो रटे-रटाए बयान सामने आए,​तनुजा मिश्रा (महिला पर्यवेक्षिका) मुझे अप्रैल माह में ही ईचादाग पंचायत का प्रभार मिला है। मुझे केंद्र बंद रहने की कोई जानकारी नहीं थी। अब मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। ​कामेश्वर बेदिया (बीडीओ सह प्रभारी सीडीपीओ),यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि संबंधित सेविका बीएलओ का क्या कार्य कर रही हैं। पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी। ​इस पूरी अव्यवस्था की मुख्य वजह ओरमांझी प्रखंड में प्रशासनिक शून्यता भी है। वर्तमान में ओरमांझी में सीडीपीओ का पद रिक्त चल रहा है। पूर्व सीडीपीओ के स्थानांतरण के बाद से अब तक यहाँ नई नियुक्ति नहीं हुई है,जिसके कारण बाल विकास परियोजना कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार बीडीओ कामेश्वर बेदिया संभाल रहे हैं। एक अधिकारी पर कई विभागों का बोझ होने के कारण जमीनी स्तर पर निगरानी पूरी तरह ठप हो चुकी है और मासूमों का निवाला भ्रष्टाचार व लापरवाही की भेंट चढ़ रहा है।

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