बोकारो में 500 एकड़ जमीन पर अवैध निर्माण से संबंधित पीआईएल निष्पादित, कहा-उपलब्ध रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि संबंधित अधिकारी अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं

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Eksandeshlive Desk

रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) टाउनशिप और बोकारो शहर के विभिन्न इलाकों में सेल (सेल) तथा सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की मांग वाली जनहित याचिका निष्पादित कर दी। उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि संबंधित अधिकारी अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं। कई मामलों में बेदखली के आदेश भी पारित किए गए हैं। इसलिए इसे अधिकारियों की पूरी निष्क्रियता का मामला नहीं माना जा सकता। खंडपीठ ने अधिवक्ता भगवान प्रसाद साहू की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।

अदालत ने कहा कि जनहित याचिका का उद्देश्य अधिकारियों को कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए सक्रिय करना है। वर्तमान मामले में अधिकारियों ने अतिक्रमण और आवंटित आवासों में निर्धारित अवधि से अधिक समय तक रहने की स्थिति से इनकार नहीं किया है, बल्कि कार्रवाई शुरू करने और उसे जारी रखने की बात कही है। इन परिस्थितियों में अदालत ने किसी अतिरिक्त निर्देश की आवश्यकता नहीं समझी। याचिकाकर्ता ने अदालत से बोकारो स्टील प्लांट टाउनशिप और शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सेल तथा सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने का निर्देश देने की मांग की थी। याचिका में बीएसएल के राज्य अधिकारी की ओर से केस संख्या ए/ई/51/2012 में पारित आदेश का अनुपालन कराने का भी आग्रह किया गया था। उक्त आदेश के तहत सेल की करीब 500 एकड़ जमीन पर बने लगभग 4,000 कच्चे-पक्के मकानों और खटालों से अनधिकृत निर्माण हटाने की कार्रवाई की मांग की गई थी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, अतिक्रमणकारियों के खिलाफ करीब 271 मामले लंबित हैं। इसके अलावा, बीएसएल के आवंटित आवासों में निर्धारित अवधि से अधिक समय तक रहने वाले लोगों के खिलाफ लगभग 1,292 कार्यवाही लंबित हैं। याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी कि बीएसएल प्रबंधन और राज्य प्रशासन के बीच समन्वय की कमी के कारण अतिक्रमण हटाने और आवास खाली कराने की कार्रवाई प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रही है।

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