पेसा नियमावली के प्रावधानों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी : शिल्पी

Politics

Eksandeshlive Desk

रांची: मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि सिर्फ पेसा कानून बना देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके प्रावधानों की सही जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। जबतक ग्राम प्रधान, ग्रामसभा के सदस्य, पारंपरिक नेतृत्व और जनप्रतिनिधियों को पेसा कानून के अधिकारों और प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी नहीं होगी, तबतक इसके उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल करना कठिन होगा। मंत्री शिल्पी तिर्की शुक्रवार को बेड़ो के महादानी मैदान स्थित विवाह मंडप और अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, इटकी में ग्राम प्रधानों के साथ संवाद कार्यक्रम में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि भूरिया समिति की अनुशंसाओं के आधार पर वर्ष 1996 में पेसा कानून बनाया गया। झारखंड में भी दो जनवरी 2026 को इस पेसा नियमावली को लागू किया गया। लेकिन विचारणीय विषय है कि पेसा कानून बनने के बाद इसकी नियमावली तैयार होने में तीन दशक क्यों लग गए। इतने लंबे समय तक ग्राम प्रधानों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामसभाओं के सामने कानून के वास्तविक प्रावधानों और उनके प्रभावी इस्तेमाल को लेकर कई सवाल बने रहे।

राज्य सरकार ने विभिन्न पक्षों से विमर्श, सुझावों और जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नियमावली लागू करने की दिशा में पहल की। उन्होंने कहा कि इसके लिए गांव-गांव तक जागरूकता अभियान चलाने, ग्रामसभाओं को उनके अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों से परिचित कराने और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन में यदि कोई कठिनाई या कमी सामने आती है, तो संवाद एवं जमीनी अनुभवों के आधार पर आवश्यक सुधार की संभावनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए। मंत्री ने कहा कि पेसा कानून सिर्फ एक कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, परंपरा, सामुदायिक अधिकारों और ग्राम स्वशासन को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। हमारा उद्देश्य है कि ग्रामसभा केवल औपचारिक संस्था बनकर न रह जाए, बल्कि वह जागरूक, सक्षम और स्थानीय स्वशासन की प्रभावी इकाई के रूप में कार्य करे। मौके पर पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि ग्राम प्रधानों को हाट-बाजार, स्थानीय विवाद और खनन सहित विभिन्न विषयों पर ग्रामसभा के अधिकारों को समझना चाहिए। उन्होंने निष्पक्षता से सभी समुदायों के हितों की रक्षा करने और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप अधिकारों का इस्तेमाल करने की अपील की। कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर संजीव भगत, करमा उरांव, बेरोनिका उरांव, मोदशीर हक, रमेश महली, राजन किस्पोट्टा, अबूमाज और भोमा सिंह सहित अन्य लोग मौजूद थे।

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