रांची। भाजपा ने झारखंड में एसआईआर के विरोध में कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन पर कड़ा प्रहार किया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि झारखंड कांग्रेस का आंदोलन विरोधाभासों से भरा है। उन्होंने कहा कि झारखंड में एसआईआर की प्रक्रिया को लागू करने की जिम्मेदारी बीएलओ, बीडीओ,सीओ, एसडीएम , उपायुक्त जैसे अधिकारियों की है, जो राज्य की हेमंत सोरेन सरकार के प्रशासनिक तंत्र के अंतर्गत काम कर रहे हैं। इसके अलावा कांग्रेस और झामुमो के कार्यकर्ता भी बूथ लेवल एजेंट (इछअ) के रूप में इस प्रक्रिया में शामिल हैं। ऐसे में एसआईआर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाकर कांग्रेस अपनी ही सरकार और अपने ही कार्यकतार्ओं की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगा रही है।अजय साह ने कहा कि राज्य में इछड घर-घर जाकर मतदाताओं के नाम जोड़ने और मतदाता सूची दुरुस्त करने का काम कर रहे हैं। परिवारों तक तीन-तीन बार पहुंचकर प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जिनकी मैपिंग नहीं हो पाई है, उन्हें भी फॉर्म-6 के माध्यम से नए सिरे से नाम जुड़वाने का अवसर दिया जा रहा है। वहीं फॉर्म-8 के जरिए पता परिवर्तन की प्रक्रिया भी जारी है। इस पूरी प्रक्रिया में विभिन्न दलों के कार्यकर्ता इछअ के रूप में भूमिका निभा रहे हैं।उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि पार्टी बताए कि उसके कितने कार्यकर्ता इछअ के रूप में सक्रिय हैं, कितने लोगों ने फॉर्म-6 से नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए आवेदन दिया और उनमें से कितने अस्वीकृत हुए। यदि कांग्रेस मतदाताओं के नाम काटे जाने का दावा कर रही है, तो उसे ठोस आंकड़ों और प्रमाणों के साथ सामने आना चाहिए। सड़क पर आंदोलन करने के बावजूद कांग्रेस उन लोगों की पर्याप्त संख्या भी सामने नहीं रख पाई है, जिनके नाम काटे जाने का वह दावा कर रही है।अजय साह ने कहा कि जिस कांग्रेस पर सोनिया गांधी के भारतीय नागरिक बनने से पहले ही मतदाता सूची में नाम दर्ज होने पर सवाल उठते रहे हैं और जिस पर वर्षों तक बांग्लादेशी घुसपैठियों को वोटर लिस्ट में शामिल करने के आरोप लगते रहे हैं, उसका यह विरोध राजनीतिक अवसरवाद है। कांग्रेस को राजनीतिक नौटंकी करने के बजाय ठोस सबूत पेश करने चाहिए। सड़क पर प्रदर्शन से बेहतर है कि कांग्रेस अपने इछअ के माध्यम से मतदाताओं की सहायता करे और यदि कहीं वास्तविक अनियमितता है तो उसे प्रमाण के साथ सामने ला
