जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए दर-दर भटक रहें बुजुर्ग रोहन यादव

Ek Sandesh Live

By Ajay Raj

सीओ से लेकर अनुमंडल पदाधिकारी तक लगा चुकें है गुहार, नहीं मिली राहत, थक-हार कर उपायुक्त के जनता दरबार पहुंचा पीड़ित, न्याय की लगाई आस


प्रतापपुर (चतरा): प्रतापपुर प्रखंड अंतर्गत टंडवा पंचायत के जमुआ गांव निवासी बुजुर्ग रोहन यादव अपनी पुस्तैनी खतियानी रैयती जमीन को कथित अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए पिछले कई महीनों से सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। उम्र के इस पड़ाव में न्याय की उम्मीद लिए वे सीओ कार्यालय से लेकर अनुमंडल दंडाधिकारी कार्यालय तक कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
आखिरकार निराश होकर उन्होंने चतरा उपायुक्त के जनता दरबार में आवेदन देकर न्याय की मांग की है।
पीड़ित रोहन यादव का आरोप है कि उनकी पुश्तैनी रैयती जमीन के खाता संख्या 11, प्लॉट संख्या 86, रकबा 74 डिसमिल ज़मीन जो सर्वे खतियान चचेरे परदादा दसई अहीर के नाम से दर्ज है उसपर गांव के हीं रहने वाले केदार यादव, रोहन यादव, गणेश यादव वैगरह द्वारा जबरन कब्जा करने के नियत से घर का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि संबंधित जमीन उनके पूर्वजों के नाम से खतियान में दर्ज है और वर्षों से उनका परिवार उस भूमि का मालिकाना हक रखता आया है। बावजूद इसके, कुछ लोगों द्वारा जमीन पर कब्जा करने के नियत से घर बनाया जा रहा है।
इस संबंध में रोहन यादव द्वारा अनुमंडल दण्डाधिकारी चतरा के समक्ष आवेदन पत्र प्रस्तुत कर न्याय की गुहार लगाई गई है। फलस्वरुप अनुमंडल दंडाधिकारी चतरा द्वारा अपने पत्रांक 177 / 20.05. 2026 को भूमि पर यथा स्थिति बनाए रखते हुए प्रतापपुर थाना एवं अंचल कार्यालय से प्रतिवेदन की मांग की।।
परंतु ताज्जुब की बात तो यह है कि इतने संवेदनशील मामले में भी अंचल अधिकारी प्रतापपुर तथा थानाप्रभारी प्रतापपुर द्वारा अनुमंडल दण्डाधिकारी चतरा के आदेश के बावजूद कोई कार्रवाई आज तक नहीं की गई है।। जिस वजह से दोनों पक्षों के बीच कभी भी खूनी संघर्ष होने की संभावना बनी हुई है जो काफी चिंताजनक मामला है।।
रोहन यादव का कहना है कि उन्होंने मामले को लेकर कई बार अंचल कार्यालय में लिखित आवेदन दिया। इसके अलावा अंचलाधिकारी, राजस्व कर्मचारियों तथा अनुमंडल पदाधिकारी से भी न्याय की गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार आवेदन देने के बावजूद न तो जमीन पर अवैधरूप से किए जा रहे गृह निर्माण को रोका गया और न ही कब्जा हटाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए गए।।
बुजुर्ग रोहन यादव ने बताया कि न्याय की उम्मीद में उन्होंने अपनी जमा-पूंजी का बड़ा हिस्सा सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने में खर्च कर दिया। उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक परेशानियां भी बढ़ रही हैं, लेकिन अपनी पुश्तैनी जमीन बचाने की लड़ाई अभी भी जारी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो जमीन कब्जे को लेकर दूसरे पक्ष के लोगों के द्वारा कभी भी हमलोगों के साथ मारपीट की जा सकती है जिसकी पूरी जिम्मेवारी प्रशासन की होगी।।मामले से जुड़े दस्तावेजों के साथ रोहन यादव हाल ही में उपायुक्त के जनता दरबार पहुंचे और पूरे प्रकरण से अवगत कराया। उन्होंने उपायुक्त से निष्पक्ष जांच कराकर उनकी खतियानी रैयती जमीन पर अवैध निर्माण रोकते हुए उसे अवैध कब्जे से मुक्त कराने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।वहीं समाजसेवियों एवं ग्रामीणों का कहना है कि जब गरीबों का खतियानी रैयती निजी जमीन भी सुरक्षित नहीं है तो फिर थाना एवं अंचल द्वारा हर सप्ताह लगनेवाले थाना दिवस का क्या औचित्य है ?? यह समझ से परे है!!
भूमि विवादों के कारण क्षेत्र में कई परिवार वर्षों से परेशान हैं। ऐसे मामलों का समयबद्ध निष्पादन नहीं होने से लोगों का प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ता है। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर बुजुर्ग को न्याय दिलाने की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि उपायुक्त के जनता दरबार में पहुंची इस फरियाद पर प्रशासन कितना गंभीर रुख अपनाता है और महीनों से न्याय की आस लगाए बैठे बुजुर्ग रोहन यादव को आखिर कब राहत मिलती है।

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