भ्रष्टाचार और अपने अधिकारों के लिये लड़ते रहे, जीतेंगे जरूर: डॉ. सूरज मंडल

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गले तक घोटाले, भ्रष्टाचार और आम जनता को त्रस्त करने में जुटी है हेमंत सरकार

रांची: अखिल भारतीय संपूर्ण क्रांति राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद, पूर्व जैक उपाध्यक्ष और झारखण्ड मजदूर मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सूरज मंडल ने कहा है कि अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के खिलाफ एवं पारदर्शिता के साथ ही अपने अधिकारों के लिये लड़ रहे छात्र-छात्रा और युवाओं का लड़ना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है और अगर वह ऐसे ही लड़ते रहें तो जीत सुनिश्चित है. डॉ. मंडल ने कहा कि कठिन परिश्रम, कड़े संघर्ष और आपसी एकजुटता के बाद अलग झारखण्ड प्रदेश का गठन किया गया था. इसमें लाखों लोगों का बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा जिन्होंने अपने जीवन का सबसे पहला उद्देश्य अलग झारखण्ड के गठन को ही मान लिया था. उन्होंने अफसोस व्यक्त करते हुए कहा कि इतने कठिन संघर्ष और आपसी सामंजस्य से प्राप्त झारखण्ड में आज न सिर्फ भ्रष्टाचार का कोहराम मचा है बल्कि पारदर्शिता भी पूरी तरीके समाप्त हो चुकी है. सरकार के शीर्ष नेतृत्व का भ्रष्टाचार, अदूरदर्शिता और जनविरोधी ही अघोषित नीति है जहाँ राज्य के आम जनमानस के साथ ही झारखण्ड के छात्र-छात्राओं और प्रतियोगियों का नम्बर कहीं नहीं आता है. 14 वीं जेपीएससी परीक्षा का परिणाम सामने आने के बाद सारे मामले का भंडाफोड़ हो गया है जिसकी लीपापोती में पूरी सरकार जी-जान से जुटी है.
झारखण्ड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में हुई व्यापक स्तर की अनियमित, नौकरी बेचने और घोटाले को दुर्भाग्य की संज्ञा देते हुए डाॅ. मंडल ने कहा कि यह स्थिति झारखण्ड गठन के बाद से ही है लेकिन अभी काबिज गैर आंदोलनकारियों की सरकार को दर्द नहीं पता और उसने इसे इतना अधिक बढ़ावा दिया कि छात्र-छात्राओं और युवाओं को बेची जा रही नौकरी के खिलाफ सड़कों पर आना पड़ा. डाॅ. मंडल ने कहा कि यदि घोटाले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कोई सहभागिता नहीं है तो जेपीएससी घोटाले की जाँच सीबीआई से करवाने में सरकार को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिये. लेकिन सरकार इस माँग से जितना पीछे हट रही है उससे लोगों की समझ में यह आ रहा है कि राज्य सरकार के शीर्ष नेतृत्व की इस घोटाले में गहरी संलिप्तता है. सीजीएल परीक्षा को रद्द करने की माँग को भी उन्होंने पूरी तरीके से न्यायोचित बताते हुए कहा कि जेपीएससी और जेएसएससी को पूरी तरीके से पुनर्गठित करने के साथ ही किसी सक्षम ईमानदार और कर्तव्य निष्ठा व्यक्ति को इसकी कमान सौंपी जानी चाहिये.

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