By Mustaffa
ओरमांझी (रांची): झारखंड में जंगली हाथियों का उत्पात जितना खौफनाक है,उससे कहीं ज्यादा दर्दनाक और शर्मनाक वन विभाग व स्थानीय प्रशासन का ढर्रा है। ओरमांझी थाना क्षेत्र के चकला निवासी 56 वर्षीय लक्ष्मण करमाली इसका जीता-जागता उदाहरण हैं। छह महीने पहले वन्यजीव के हमले में अपना सब कुछ गंवा चुके लक्ष्मण आज मुआवजे की एक-एक पाई के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट पर रेंगने को मजबूर हैं,लेकिन संवेदनहीन व्यवस्था की नींद नहीं टूट रही। घटना बीते 4 नवंबर 2025 की है। रोज की तरह लक्ष्मण करमाली सुबह अपने खेत की तरफ गए थे,तभी अचानक एक जंगली हाथी ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया। हाथी ने अपनी सूंड़ और पैरों से पटककर उनके सीने और पैर की हड्डियां चकनाचूर कर दी थीं। महीनों चले महंगे इलाज और जमीन-जेवर दांव पर लगाने के बाद लक्ष्मण की जान तो बच गई,लेकिन वे हमेशा के लिए लाचार हो गए। जो हाथ कभी मजदूरी कर परिवार का पेट पालते थे,वे आज लाठी के सहारे दो कदम चलने को भी तरस रहे हैं। शारीरिक लाचारी और आर्थिक तंगी के इस दोहरे वार ने पूरे परिवार को भुखमरी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। गंभीर शारीरिक अक्षमता और इलाज के कर्ज ने इस परिवार को इस कदर तोड़ा है कि उनके पास सिर छुपाने को छत तक नहीं है। पीड़ित लक्ष्मण करमाली गांव के एक सरकारी जर्जर वाचनालय भवन में प्लास्टिक के बोरे का पर्दा (दरवाजा) बनाकर रहने को विवश हैं। यह स्थिति धरातल पर विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलती है। इस पूरे मानवीय संकट में स्थानीय चकला पंचायत के मुखिया शिवनाथ मुंडा की भूमिका घोर लापरवाही की मिसाल बन चुकी है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि मुखिया ने इस गरीब परिवार की सुध लेना तो दूर,सरकारी स्तर पर मुआवजा दिलाने के लिए एक आवेदन के बाद,फिर अपनी कदम को कभी आगे नहीं बढ़ाया। स्थानीय जनप्रतिनिधि की इस घोर अनदेखी ने पीड़ित की राह को और पथरीला बना दिया है। इधर,इलाके के पूर्व सांसद रामटहल चौधरी जब प्रखंड मुख्यालय पहुंचे,तो पीड़ित ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। बेबसी की यह दास्तान सुन पूर्व सांसद का पारा चढ़ गया। उन्होंने तुरंत अंचलाधिकारी (सीओ) उज्जवल सोरेन से मुलाकात कर अपनी तीव्र नाराजगी दर्ज कराई और जल्द से जल्द मुआवजा भुगतान की चेतावनी दी। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर अविलंब मुआवजा नहीं मिला,तो वे पीड़ित को लेकर रांची उपायुक्त (डीसी) के जनता दरबार जाएंगे और वहीं अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे। वहीं,अंचलाधिकारी ओरमांझी उज्जवल सोरेन ने कहा,मामला संज्ञान में आया है। वन विभाग और अंचल कार्यालय के समन्वय से फाइल को आगे बढ़ाया जा रहा है। कागजी प्रक्रिया पूरी होते ही पीड़ित परिवार को नियमानुसार मुआवजा राशि उपलब्ध करा दी जाएगी।
