रांची। प्रदेश कांग्रेस ने जातिगत जनगणना में ओबीसी की स्पष्ट पहचान के लिए अलग कोड की मांग की है। प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने शुक्रवार को कांग्रेस भवन में प्रेस वार्ता में कहा कि देश में जनगणना शुरू हो चुकी है। पहले चरण में मकानों की गिनती पूरी हो चुकी है, अब व्यक्तियों की गिनती होनी है। ऐसे में ओबीसी की जातिगत पहचान और वास्तविक जनसंख्या का वैज्ञानिक आकलन जरूरी है। केशव महतो ने कहा कि झारखंड में पिछड़ों की बड़ी आबादी है, लेकिन उन्हें जनसंख्या के अनुपात में हक नहीं मिल रहा है। मंडल कमीशन के तहत 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन राज्य के सात जिलों में डइउ का आरक्षण शून्य है, जो चिंताजनक है। उन्होंने मांग की कि जनगणना फॉर्म में एसी-एसटी की तरह ओबीसी के लिए भी अलग कोड हो और राज्यवार ओबीसी जातियों को सूचीबद्ध किया जाए। उन्होंने बताया कि 16 सितंबर को ओबीसी मोर्चा बापू वाटिका से राजभवन तक मार्च कर ज्ञापन देगा। सरना धर्म कोड, खनिज संसाधनों और चंदा चोरी के विरोध में कांग्रेस 26 सितंबर को शहीद चौक से राजभवन तक मार्च करेगी और 5 से 10 अक्टूबर तक प्रखंड स्तर पर प्रदर्शन होगा।प्रदीप यादव ने कहा कि इस बार जनगणना में जाति के लिए ड्रॉपडाउन लिस्ट या डइउ का अलग कॉलम नहीं दिया गया है, बल्कि खुला कॉलम रखा गया है जिसमें व्यक्ति खुद जाति लिखेगा। इससे आंकड़ों की शुद्धता पर सवाल उठेंगे। 2011 की रएउउ के जातिगत आंकड़े सार्वजनिक नहीं हुए और केंद्र ने 2021 में सुप्रीम कोर्ट में उन्हें त्रुटिपूर्ण बताया था। यदि व्यवस्था नहीं सुधरी तो फिर वही समस्या होगी। उन्होंने कहा कि सही आंकड़ों के बिना डइउ के लिए प्रभावी नीतियां और आरक्षण के फैसले नहीं हो सकते। जातिगत जनगणना सामाजिक न्याय का आधार है।नवनियुक्त डइउ प्रदेश अध्यक्ष निशांत जायसवाल ने भी अलग कोड की मांग का समर्थन किया। मौके पर सतीश पॉल मुजनी, डॉ. तौसीफ, गजेंद्र सिंह, उज्जवल प्रकाश तिवारी और राकेश किरण महतो मौजूद थे।
