माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में भारी गड़बड़ी का आरोप, 5000 परीक्षार्थियों की आंसर-की गायब
MUSTFA
रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों के घेरे में है। हाल ही में आयोजित ‘माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा’ में हुई भारी अनियमितताओं के खिलाफ मंगलवार को अभ्यर्थियों ने आयोग मुख्यालय के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। झारखंड छात्र संघ के नेतृत्व में जुटे सैकड़ों छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर घंटों नारेबाजी की और जेएसएससी की कार्यशैली को ‘छात्र विरोधी’ करार दिया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे झारखंड छात्र संघ के केंद्रीय अध्यक्ष एस अली ने आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जेएसएससी अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। अली ने बताया,आयोग द्वारा जारी प्रोविजनल आंसर-की में उर्दू विषय के 32 से ज्यादा प्रश्न और उत्तर गलत थे। इसी तरह पांचपरगनिया और नागपुरी जैसे विषयों में भी 6-7 प्रश्न त्रुटिपूर्ण पाए गए। उन्होंने आगे कहा कि अभ्यर्थियों ने साक्ष्यों के साथ ऑनलाइन आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन आयोग ने बिना किसी सुधार के ही फाइनल आंसर-की जारी कर दी,जो सीधे तौर पर छात्रों के अधिकारों का हनन है। विरोध प्रदर्शन के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि लगभग 5000 से अधिक परीक्षार्थियों की उत्तर कुंजी आयोग ने जारी ही नहीं की है। जिन अभ्यर्थियों की उत्तर कुंजी आई भी है,उनमें भारी विसंगतियां हैं। प्रश्न पत्रों में गलत विकल्प और अस्पष्ट प्रश्नों की भरमार ने परीक्षार्थियों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदर्शन के अंत में अभ्यर्थियों ने जेएसएससी सचिव के नाम एक मांग पत्र सौंपा। छात्र संघ की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं: त्रुटियों के निराकरण के लिए तत्काल एक एक्सपर्ट टीम (विषय विशेषज्ञों की टोली) का गठन किया जाए। संशोधित और त्रुटिहीन फाइनल आंसर-की दोबारा जारी की जाए। मुख्यमंत्री इस मामले में हस्तक्षेप कर छात्रों को न्याय दिलाएं। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर संज्ञान नहीं लिया गया और परीक्षा परिणाम में पारदर्शिता नहीं बरती गई, तो वे राज्यव्यापी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
