Eksandeshlive Desk
रांची: मंत्रिमंडल निगरानी विभाग किसी मामले को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रख सकता है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अनुभा रावत चौधरी ने पूर्व मंत्री सरयू राय के खिलाफ सीबीआई या एसीबी जांच की मांग से जुड़ी याचिका को निपटाते हुए यह टिप्पणी की है। मनोज सिंह की ओर से दायर इस याचिका में सरयू राय को प्रतिवादी ही नहीं बनाया गया था। चार नवंबर को सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोई इस मामले में हाजिर नहीं हुआ था।
मनोज सिंह ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी। इसमें सरयू राय द्वारा खाद्य आपूर्ति मंत्री के रूप में आहार पत्रिका छपवाने में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच सीबीआई या एसीबी से कराने की मांग की गई थी। याचिका में यह कहा गया था कि भ्रष्टाचार के आरोपों के सिलसिले में याचिकादाता द्वारा वर्ष 2024 में अरगोड़ा थाने में प्राथमिकी (228/24) दर्ज करायी थी। इस मामले में पुलिस ने जांच नहीं की है। इसलिए इस प्राथमिकी को जांच के लिए सीबीआई या एसीबी को सौंपी जाए। इस मामले में सरकार की ओर से एक शपथ पत्र दायर किया गया था। इसमें यह कहा गया था कि थाने में दर्ज प्राथमिकी को निगरानी से कराने के मामला निगरानी मंत्रिमंडल को भेजा गया था। यह अभी भी वहां लंबित है। चार नवंबर को हुई सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से अदालत को यह बताया गया कि याचिका में सरयू राय को प्रतिवादी नहीं बनाया गया है।
चार नवंबर को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत में कोई हाजिर नहीं हुआ। इसलिए न्यायालय ने पहले दायर किये गये शपथ और प्रति शपथ पत्र तथा सीबीआई और याचिकादाता की ओर से दी गयी दलील के आधार पर फैसला सुनाया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि निगरानी मंत्रिमंडल किसी मामले को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रह सकता है। सक्षम पदाधिकारी ने अब तक जांच से जुड़े मामले में कोई निर्णय नहीं किया है। उनसे यह उम्मीद की जाती है कि वह इस मामले पर जल्दी निर्णय करेंगे। इस टिप्पणी के साथ ही न्यायालय ने मनोज कुमार सिंह की याचिका को निष्पादित कर दिया।
