मजदूर की मौत पर फूटा परिजनों का गुस्सा, एंबुलेंस कर्मियों को बनाया बंधक

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कर्नाटक से 12 दिन बाद गांव पहुंचा शव, डेढ़ लाख रुपये मुआवजा मिलने के बाद शांत हुआ मामला

BHASKAR UPADHYAY

विष्णुगढ़ / हजारीबाग:  प्रखंड के मडमो पंचायत अंतर्गत नीलकंठवा टोला में उस समय तनावपूर्ण माहौल उत्पन्न हो गया, जब कर्नाटक में मृत प्रवासी मजदूर खेमलाल महतो का शव 12 दिनों बाद गांव पहुंचा। आक्रोशित परिजनों एवं ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग को लेकर शव लेकर पहुंचे एंबुलेंस कर्मियों को बंधक बना लिया। मृतक खेमलाल महतो (36 वर्ष), पिता धनी महतो, परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण नवंबर 2025 में रोजगार की तलाश में कर्नाटक गए थे। वहां वे एक ट्रांसमिशन लाइन परियोजना में कार्य कर रहे थे। बताया जाता है कि 8 मई 2026 को कार्य के दौरान उनकी अचानक मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने संबंधित कंपनी से शव को गांव भेजने और उचित मुआवजा देने की मांग की थी, लेकिन आरोप है कि कंपनी लगातार मामले को टालती रही। बुधवार को जब एंबुलेंस से खेमलाल महतो का शव गांव पहुंचा, तो गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने एंबुलेंस को रोक लिया और कर्मियों को मुआवजा मिलने तक जाने नहीं दिया।

घटना की सूचना कंपनी प्रतिनिधियों तक पहुंचाई गई। काफी देर तक चले तनाव और बातचीत के बाद कंपनी की ओर से मृतक की पत्नी के बैंक खाते में तत्काल डेढ़ लाख रुपये की सहायता राशि भेजी गई। इसके बाद परिजन शांत हुए और एंबुलेंस कर्मियों को मुक्त किया गया। घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। ग्रामीणों ने कहा कि रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों में काम करने जाने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सरकार और कंपनियों को गंभीर पहल करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने मृतक परिवार को उचित सरकारी सहायता और स्थायी मुआवजा देने की मांग भी की।

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