Eksandeshlive Desk
रांची: प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा में चूक का एक बड़ा मामला सामने आया है। ओरमांझी स्थित तरंगानी लिकर्स प्राइवेट लिमिटेड नामक जिस शराब फैक्टरी को उत्पाद विभाग ने डेढ़ माह पूर्व अवैध गतिविधियों के आरोप में सील किया था,उसका ताला और सील तोड़कर चोरों ने करोड़ों रुपये के माल और उपकरणों पर हाथ साफ कर दिया। हैरानी की बात यह है कि कंपनी प्रबंधन ने सीलिंग के तुरंत बाद ही पत्राचार कर इस चोरी की अंदेशा जाहिर की थी, लेकिन प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। एक जुलाई 2026 को पुलिस और उत्पाद विभाग की संयुक्त कार्रवाई के बाद फैक्टरी को सील कर दिया गया था। इसके ठीक छह दिन बाद, 7 जुलाई 2026 को कंपनी के निदेशक विकास कुमार ने रांची के उपायुक्त (डीसी) और उत्पाद आयुक्त को लिखित आवेदन सौंपा था। पत्र में आगाह किया गया था कि फैक्टरी शहर से दूर सुनसान इलाके में है। सीलिंग के कारण स्टाफ हट चुका है और परिसर में करोड़ों की मशीनें व सामान पड़े हैं, जिससे चोरी की प्रबल आशंका है। पत्र के माध्यम से परिसर की सुरक्षा का गुहार लगाया गया था। 17 अगस्त 2026 को जब उत्पाद विभाग की टीम मजिस्ट्रेट के साथ फैक्टरी का निरीक्षण करने पहुंची, तो कंपनी की आशंका सच निकली। सील और ताले टूटे मिले, मुख्य शटर की सील टूटी हुई थी और शटर ढाई फीट तक खुला था। ऑफिस, लैब और प्रोडक्शन हॉल की ग्रिल के ताले कटे पड़े थे। सरकारी होलोग्राम और डीभीआर गायब, चोरों ने सबूत मिटाने की नीयत से ऑफिस का डीभीआर (सीसीटीवी रिकॉर्डर) पार कर दिया। इसके अलावा तैयार माल (फिनिश्ड गुड्स) और उत्पाद विभाग के अति-संवेदनशील सरकारी होलोग्राम भी गायब मिले। परिसर के पीछे की सुरक्षा दीवार को नीचे से तोड़कर चोर अंदर दाखिल हुए थे और ब्लेंडिंग रूम के सभी टैंकों के वाल्व खुले छोड़ दिए गए थे।
घटना के बाद 19 अगस्त को कंपनी के निदेशक ने ओरमांझी थाना प्रभारी को आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। आवेदन में चोरी, सरकारी सील से छेड़छाड़ और अनधिकृत प्रवेश के खिलाफ कार्रवाई, माल की बरामदगी और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की गुहार लगाई गई है। कंपनी के अनुसार कुल नुकसान का आकलन अकाउंटेंट द्वारा किया जा रहा है, जो करोड़ों में हो सकता है। फिलहाल पुलिस मामले की पड़ताल में जुट गई है।
