वाणिज्य-कर विभाग के CT-MIS परियोजना के तहत वाणिज्य-कर विभाग एवं नए सिस्टम इंटीग्रेटर के बीच एकरारनामा
Eksandeshlive Desk
रांची: झारखंड में राजस्व संग्रहण की क्षमता में वृद्धि, राजस्व ह्रास पर प्रभावी नियंत्रण तथा विभिन्न राजस्व संग्रहण करने वाले विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। इसी क्रम में वाणिज्य-कर विभाग द्वारा CT-MIS परियोजना के अंतर्गत निविदा के माध्यम से चयनित नए सिस्टम इंटीग्रेटर Choice Consultancy Services Private Limited के साथ एकरारनामा संपन्न किया गया। गुरुवार को प्रोजेक्ट भवन में आयोजित कार्यक्रम में वित्त एवं वाणिज्य-कर मंत्री राधाकृष्ण किशोर की उपस्थिति में यह एकरारनामा संपन्न हुआ।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की सोच एवं दूरदर्शी नेतृत्व के अनुरूप पहल: इस अवसर पर वित्त एवं वाणिज्य-कर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि जीएसटी रिफार्म, मनरेगा (G-RAM-G) के अंतर्गत अनुदान में कमी तथा MMDR एक्ट के कारण झारखंड को लगातार आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार इस आर्थिक क्षति के प्रति गंभीर है तथा इसकी भरपाई के लिए राज्य के अपने संसाधनों से राजस्व संग्रहण में वृद्धि करने की दिशा में प्रतिबद्धतापूर्वक कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की सोच एवं दूरदर्शी नेतृत्व के अनुरूप राज्य में राजस्व सृजन की संभावनाओं को विकसित करने तथा राजस्व संग्रहण को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। वाणिज्य-कर विभाग द्वारा राजस्व संग्रहण करने वाले विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर राजस्व वृद्धि की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री किशोर ने कहा कि गुरुवार को संपन्न हुआ यह एकरारनामा झारखंड के राजस्व तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इस अवसर पर वित्त मंत्री ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन एवं वाणिज्य-कर विभाग की ओर से इस महत्वपूर्ण पहल के सफल क्रियान्वयन हेतु बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि यह राज्य के राजस्व प्रशासन को तकनीक आधारित, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने इस दिन को झारखंड के इतिहास में स्वर्णिम दिन बताते हुए कहा कि राज्य की वित्तीय आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने के लिए राजस्व संग्रहण की क्षमता में वृद्धि करना आवश्यक है।
केंद्र की आर्थिक नीतियों के कारण झारखंड को लगभग 22 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति: वित्त एवं वाणिज्य-कर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि केंद्र की आर्थिक नीतियों के कारण झारखंड को लगभग 22 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हो रही है। झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है, लेकिन खनिजों के दोहन के कारण प्रदूषण, वन क्षेत्र एवं जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त खनिज परिवहन के कारण राज्य की सड़कों को भी नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि इन सभी प्रतिकूल प्रभावों की भरपाई राज्य सरकार को अपने संसाधनों से करनी पड़ रही है। MMDR एक्ट के कारण राज्य को लगभग 14 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हो रही है। वहीं, जीएसटी सुधार एवं मनरेगा के अंतर्गत अनुदान में कमी के कारण राज्य को लगभग चार-चार हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि इन परिस्थितियों में राज्य को अपने स्तर पर राजस्व संग्रहण में वृद्धि करनी होगी। वाणिज्य-कर विभाग द्वारा इस दिशा में आवश्यक तैयारी कर ली गई है। संपन्न हुआ एकरारनामा राज्य के राजस्व संसाधनों को सुदृढ़ करने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है।
छह माह में विकसित होगी Integrated Revenue Intelligence System (IRIS) प्रणाली: वाणिज्य-कर आयुक्त-सह-सचिव अमित कुमार ने परियोजना की कार्यप्रणाली एवं तकनीकी पहलुओं की जानकारी देते हुए बताया कि नए सिस्टम इंटीग्रेटर द्वारा राज्य सरकार के राजस्व संबंधी विभिन्न विभागों के आईटी एप्लीकेशन एवं ऑनलाइन पोर्टल के साथ अंतर-विभागीय एकीकरण स्थापित करते हुए Integrated Revenue Intelligence System (IRIS) विकसित की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस प्रणाली के अंतर्गत राजस्व संग्रहण करने वाले विभिन्न विभागों के ऑनलाइन पोर्टल को एकीकृत किया जाएगा। विभिन्न विभागों से उपलब्ध डेटाबेस का विश्लेषण करने के लिए Business Intelligence (BI) एवं Artificial Intelligence (AI) आधारित टूल्स का उपयोग किया जाएगा। इसके माध्यम से विभिन्न प्रकार के करों में संभावित कर अपवंचन एवं राजस्व ह्रास की पहचान तथा निगरानी की जा सकेगी। IRIS प्रणाली के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर संबंधित विभागों द्वारा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे राजस्व संग्रहण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने, विभागीय समन्वय को सुदृढ़ करने तथा राजस्व ह्रास पर नियंत्रण स्थापित करने में सहायता मिलेगी।
विभिन्न विभागों के ऑनलाइन पोर्टल का होगा API Integration: अमित कुमार ने बताया कि IRIS प्रणाली के विकास एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों के ऑनलाइन पोर्टल का API Integration किया जाएगा। इसके अंतर्गत प्रमुख रूप से निम्नलिखित पोर्टल को एकीकृत किया जाना प्रस्तावित है—GSTN API के साथ खान एवं भूतत्व विभाग के JIMMS पोर्टल।परिवहन विभाग के VAHAN पोर्टल। कार्य विभागों एवं आईटी विभाग के WAMIS पोर्टल। राजस्व विभाग के भूमि पंजीकरण पोर्टल। नगर विकास विभाग के Property Tax पोर्टल। श्रम विभाग के Labour Cess पोर्टल। VAT पोर्टल के साथ परिवहन विभाग के VAHAN पोर्टल एवं उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के राजस्व पोर्टल। JPT पोर्टल के साथ नगर विकास विभाग के ट्रेड लाइसेंस पोर्टल। JED पोर्टल के साथ ऊर्जा विभाग के बिजली बिल पोर्टल। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत IRIS प्रणाली का विकास छह माह की अवधि में किया जाएगा तथा आगामी तीन वर्षों तक इसका क्रियान्वयन किया जाएगा।
राजस्व संग्रहण की प्रक्रिया होगी अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी: Choice Consultancy Services Private Limited के प्रतिनिधि सुभाष पाठक ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रस्तावित IRIS प्रणाली की कार्यप्रणाली, तकनीकी संरचना एवं क्रियान्वयन संबंधी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभिन्न विभागों के डेटाबेस एवं ऑनलाइन पोर्टल के एकीकरण से राजस्व संबंधी सूचनाओं का समेकित विश्लेषण संभव होगा। इससे संभावित कर अपवंचन एवं राजस्व ह्रास की पहचान करने तथा संबंधित विभागों द्वारा समयबद्ध एवं नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। कार्यक्रम में संयुक्त सचिव पूनम कुजूर, राज्य-कर अपर आयुक्त दिलीप कुमार मंडल, जीवनारायण मंडल सहित विभाग के अन्य पदाधिकारीगण एवं कंसल्टेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
