Reporting By Sunil
रांची : राज्य में बारिश और उमस भरी गर्मी शुरू होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश की घटनाओं में होने वाली अचानक वृद्धि को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखण्ड के अभियान निदेशक ने सर्पदंश से होने वाली आकस्मिक घटनाओं के बचाव, रोकथाम तथा उपचार से सम्बंधित मार्गदर्शिका के अनुपालन का निर्देश दिया है। हाल ही में सर्पदंश के मामलों और इससे होने वाली मौतों को अधिसूचित रोग के रूप में अधिसूचित कर दिया है। इस निर्णय के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखण्ड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने राज्य के सभी सिविल सर्जन को पत्र जारी कर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा निर्धारित नेशनल स्नेकबाइट मैनेजमेंट प्रोटोकॉल का हर स्तर पर कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।भारत सरकार के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र द्वारा शुरू की गई राष्ट्रीय कार्य योजना का लक्ष्य वर्ष 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों और विकलांगता को 50 प्रतिशत करना है, जिसके तहत झारखण्ड में वित्तीय वर्ष 2024-25 से ही स्नेक बाइट प्रीवेंशन एंड कंट्रोल प्रोग्राम का क्रियान्वयन किया जा रहा है। सर्पदंश से होने वाली मौतों का सबसे मुख्य कारण अस्पताल पहुँचने और इलाज शुरू होने में होने वाली देरी के साथ-साथ समुदाय में जागरूकता की भारी कमी है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग साँप काटने पर झाड़-फूंक, नीम-हकीम, पारंपरिक ओझाओं और जादू-टोने के जाल में फंस जाते हैं, जो चिकित्सा विभाग के सामने मौतों के आंकड़ों को रोकने में सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।अब सर्पदंश के अधिसूचित रोग घोषित होने के बाद राज्य के भीतर काम करने वाले सभी चिकित्सा संस्थानों—चाहे वे सरकारी अस्पताल हों, निजी क्लिनिक हों, कॉपोर्रेट अस्पताल, रेलवे, आर्मी व आयुष के स्वास्थ्य केंद्र हों या फिर पैथोलॉजिकल और रेडियोलॉजिकल लैब्स हों—उन सभी के लिए सर्पदंश के प्रत्येक पुष्ट या संदिग्ध मामले की पाक्षिक रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी गई है। इस आपदा से ससमय निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला अस्पतालों, अनुमंडल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सभी मेडिकल कॉलेजों में एंटी स्नेक वेनम सीरम की शत-प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित करने का आदेश दिया है, क्योंकि इस जीवन रक्षक दवा को अत्यावश्यक दवा सूची में शामिल किया गया है। यदि किसी दूरस्थ स्वास्थ्य केंद्र में इसकी कमी होती है, तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से तुरंत दवा की खेप उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, साथ ही इसकी वास्तविक स्थिति पर राज्य स्तर से नजर रखने के लिए ‘ई-औषधि’ के डीवीडीएमएस पोर्टल पर डेटा प्रविष्टि को अनिवार्य किया गया है। इसके समानांतर, सभी चिकित्सा अधिकारियों और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों को सर्पदंश प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है और अस्पतालों में भारत सरकार द्वारा तैयार पोस्टरों का प्रदर्शन किया जा रहा है। झारखण्ड में पाई जाने वाली साँपों की 250 से अधिक प्रजातियों में से महज 25 प्रतिशत ही विषैली होती हैं, और अधिकांश मौतें साँप के वास्तविक जहर से नहीं बल्कि अत्यधिक घबराहट के कारण हृदय गति रुक जाने से होती हैं। खेतों में मिलने वाले रसेल वाइपर के काटने से जहाँ खून पतला होकर ब्लीडिंग शुरू होती है, वहीं सफेद छल्लों वाला करैत भी बेहद खतरनाक होता है। जनहित में जारी की गई आधिकारिक गाइडलाइन के अनुसार, सर्पदंश होने पर प्राथमिक उपचार के दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। राज्य की नि:शुल्क एम्बुलेंस सेवा हेल्पलाइन नंबर 108 पर तुरंत कॉल किया जा सकता है,एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर पूरी तरह से नि:शुल्क उपलब्ध है।
