सेवा यात्रा के अनुभव जीवन की पूंजी, भारत को किताबों से नहीं गांव-गांव जाकर समझें : मोदी

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘सेवा संकल्प अभियान’ के सेवा यात्रियों से कहा कि यात्रा के दौरान अलग-अलग राज्यों के गांवों में लोगों से जुड़ने और सेवा कार्य करने के अनुभव उनके जीवन की अमूल्य पूंजी बनेंगे। उन्होंने युवाओं से कहा कि भारत की विविधता, गांवों की संस्कृति और समाज की सेवा भावना को किताबों से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता, इसके लिए गांव-गांव जाकर लोगों के बीच रहना जरूरी है। मोदी ने यात्रियों से यात्रा के अनुभवों को लिखने और दर्ज करते रहने का भी आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत वडनगर से वाराणसी जाने वाले दल के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद में कहा कि पिछले करीब 10-12 वर्षों में गांवों में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं में बड़ा बदलाव आया है तथा शहर और गांव के बीच का अंतर काफी कम हुआ है। उन्होंने नमो ड्रोन दीदी और लखपति दीदी जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए यात्रियों से पूछा कि क्या उन्हें गांवों में बदलाव महसूस हो रहा है और क्या ग्रामीण भी इस बदलाव की चर्चा करते हैं। यात्रा युवाओं को इन बदलावों को प्रत्यक्ष रूप से देखने और लोगों से सीधे संवाद करने का अवसर दे रही है।

मोदी ने सेवा यात्रियों को सुरक्षा का भी ध्यान रखने की सलाह दी। संवाद के दौरान यात्रियों के भगवा साफे का उल्लेख करते हुए उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “बाइक चलाते समय आप यह साफा पहनकर तो नहीं चलते होंगे? हेलमेट पहनते होंगे ना? साफा को हेलमेट मत समझ लेना।” उन्होंने यात्रियों से परिवार के संपर्क में रहने, जिन क्षेत्रों से गुजरें वहां के लोगों से जुड़ने और उनके संपर्क नंबर लेने तथा वाट्सऐप समूह बनाने का भी सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उन्हें याद याद किया। दीनदयाल उपाध्याय के समाज जीवन में कर्तव्यों से जुड़े सात सूत्रों- सेवा भाव, संतुलन, संयम, समन्वय, सकारात्मकता, संवेदना और संवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यही सेवा संकल्प यात्रा की आत्मा हैं। गांवों में बच्चों को पढ़ाई की सामग्री देना, पौधारोपण करना, वृद्धजनों की सेवा करना, महिलाओं से संपर्क करना और युवाओं के सपनों को समझना अलग-अलग कार्य दिखाई देते हैं, लेकिन इनके पीछे मानवता को केंद्र में रखकर समाज की सेवा का भाव समान है। मोदी ने महात्मा गांधी के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के साथ सामाजिक सुधार के लिए भी काम किया और समाज में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ लगातार आवाज उठाई। समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। सिर्फ अपनी वोट बैंक की तरफ ध्यान रख के सब कुछ चलता है चलने दो ऐसा नहीं करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने सफाईकर्मियों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज के लिए सफाई का काम करने वालों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने प्रयागराज में सफाईकर्मियों के पैर धोकर सम्मान करने की घटना का भी जिक्र किया और कहा कि उनके काम से भारत का मान बढ़ा है।

प्रधानमंत्री ने दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यक्ति का विकास समाज और देश से अलग नहीं हो सकता। समाज का विकास प्रकृति को नुकसान पहुंचाकर नहीं होना चाहिए और देश के विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेवा का यही भाव अंत्योदय के विचार तक ले जाता है। मोदी ने कहा कि सफलता का रास्ता छोटे-छोटे प्रयासों से बनता है और इन्हीं प्रयासों की सिद्धि से बड़े लक्ष्य हासिल होते हैं। उन्होंने सेवा यात्रियों से कहा कि यात्रा के दौरान मिले अनुभवों को लिखें और रिकॉर्ड करें, क्योंकि यात्रा समाप्त होने के बाद ये अनुभव जीवन में बहुत काम आएंगे। अभी प्रत्येक टोली में करीब 20 लोग हैं, लेकिन वडनगर और काशी पहुंचने पर दोनों तरफ करीब 500-500 लोग होंगे। उन्होंने सभी को दो-तीन घंटे साथ बैठकर अपने अनुभव साझा करने का सुझाव दिया। सेवा संकल्प यात्रा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात सहित 10 राज्यों के 193 जिलों, 773 तहसीलों और 10,159 गांवों से होकर गुजर रही है। यात्रा के दौरान वृक्षारोपण, स्वच्छता, फल वितरण, चिकित्सा सहायता, किट वितरण और अंगदान के संकल्प सहित करीब 25 प्रकार के सेवा कार्य किए जा रहे हैं। 25 सितंबर तक 20 टोलियों ने कुल 13,733 किलोमीटर की दूरी तय की थी, जबकि वाराणसी से वडनगर जाने वाली टोलियों ने 5,961 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर ली थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि सेवा संकल्प यात्रा नदी की तरह सबको जोड़ने वाली है। नदी यह नहीं पूछती कि कौन किस भाषा, परिवार या आर्थिक वर्ग से है, वह सभी को नवजीवन देती है। इसी तरह सेवा यात्रा भी लोगों से जुड़ते हुए जनकल्याण से जगकल्याण की भावना को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने सेवा यात्रियों से अपनी सुरक्षा का ध्यान रखने, परिवार से संपर्क बनाए रखने और यात्रा के दौरान अधिक से अधिक लोगों से जुड़ने का आह्वान किया।

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