Eksandeshlive Desk
मुंबई : गुजरात के बहुचर्चित सोहराबुद्दीन शेख के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में बंबई उच्च न्यायालय ने विशेष अदालत के महत्वपूर्ण फैसले को बरकरार रखते हुए 21 पुलिस अधिकारियों समेत सभी 22 आरोपियों को बरी करने का निर्णय बरकरार रखा है। सोहराबुद्दीन शेख के भाइयों की दायर याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया। यह मामला वर्ष 2005 का है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी जांच में दावा किया था कि सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति का अपहरण कर उनकी फर्जी मुठभेड़ में हत्या की गई थी। सीबीआई के अनुसार, 26 नवंबर 2005 को अहमदाबाद में सोहराबुद्दीन शेख का एनकाउंटर किया गया, जबकि कौसर बी की हत्या कर शव को ठिकाने लगाया गया था। इसके एक वर्ष बाद तुलसीराम प्रजापति की भी कथित फर्जी मुठभेड़ में मौत हो गई थी। इस मामले में गुजरात, राजस्थान और आंध्र प्रदेश के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया गया था।
वर्ष 2018 में विशेष सीबीआई अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया था। अदालत ने अपने 358 पृष्ठों के फैसले में सीबीआई की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए थे। अदालत ने टिप्पणी की थी कि जांच एजेंसी ने निष्पक्ष जांच के बजाय पूर्वनिर्धारित कहानी के आधार पर राजनीतिक नेताओं को फंसाने का प्रयास किया। इस फैसले के खिलाफ सोहराबुद्दीन शेख के भाइयों रुबाबुद्दीन और नयाबुद्दीन ने बंबई उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि विशेष अदालत ने कई गवाहों के बयान और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नजरअंदाज किया। हालांकि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने विशेष अदालत के निर्णय को सही ठहराया। सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने कहा कि विशेष अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहियों की गहन जांच के बाद ही फैसला सुनाया था। वहीं, याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि इस मामले में ‘धारा 197’ के तहत किसी विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं थी। इसके बावजूद उच्च न्यायालय ने फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
