परिसीमन देशहित में आयोग की पारदर्शिता व जातीय जनगणना पहले सुनिश्चित हो: कैलाश यादव

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News By Sunil

रांची। झारखंड प्रदेश राजद के प्रवक्ता कैलाश यादव ने कहा है कि देश में प्रस्तावित परिसीमन संविधान के अनुरूप और देशहित में है, लेकिन इसे पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि परिसीमन आयोग को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए तथा क्षेत्रवार आदिवासी-जनजातीय समाज के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होने की गारंटी दी जाए। जारी बयान में यादव ने कहा कि देश की आबादी लगभग 150 करोड़ तक पहुंच चुकी है। ऐसे में जनसंख्या के अनुरूप परिसीमन होने से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक भागीदारी मजबूत होगी तथा पंचायत के अंतिम व्यक्ति तक लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का लाभ पहुंचेगा।उन्होंने कहा कि परिसीमन का आधार जनसंख्या है, इसलिए पहले देश में जातीय जनगणना कराई जानी चाहिए। उनका कहना था कि यदि परिसीमन वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाता है तो इससे कई सवाल खड़े हो सकते हैं।कैलाश यादव ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी नहीं रही है। उन्होंने कहा कि यदि परिसीमन आयोग की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होगी तो इसकी निष्पक्षता पर भी सवाल उठेंगे। उन्होंने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए उसमें कथित त्रुटियों का उल्लेख किया।राजद प्रवक्ता ने कहा कि छोटे राज्यों, विशेषकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में परिसीमन के संभावित प्रभावों को लेकर कई आशंकाएं हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ना चाहिए और किसी भी समुदाय के साथ अन्याय या भेदभाव न हो, इसकी संवैधानिक गारंटी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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