झारखंड कोई खुली धर्मशाला नहीं है कि बाहर से दलाल और बिचौलिए आएं, हमारी जमीन भी लूटे और हम पर हुकुम भी चलाए: विधायक भूषण बाड़ा

Ek Sandesh Live Political

माटी आदिवासियों का है तो राज भी आदिवासी करेगा

AMIT RANJAN


सिमडेगा/रांची: राजधानी के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में रविवार को परिसीमन के मुद्दे पर आयोजित आदिवासी महाजुटान रैली में जनसैलाब उमड़ पड़ा। पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के साथ जुटे हजारों लोगों के बीच सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा ने केंद्र सरकार और भाजपा की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि आदिवासियों की चुप्पी का दौर अब खत्म हो चुका है और हक की खातिर पंचायत से संसद तक नया उलगुलान शुरू होगा। विधायक ने मांग उठाई कि राज्य के सभी 13 अनुसूचित जिलों की लोकसभा, विधानसभा और पंचायत सीटों को शत-प्रतिशत आदिवासियों के लिए आरक्षित किया जाए। उन्होंने कहा कि जब जमीन हमारी है और नीतियां हमारे लिए बननी हैं, तो कानून बनाने वाला जनप्रतिनिधि भी केवल इसी माटी का बेटा होना चाहिए। बाहरी नुमाइंदों के हाथों समाज के फैसले तय नहीं होंगे।

प्रशासनिक तंत्र पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि फाइलों के आंकड़े चमकाने के लिए भोले-भाले आदिवासियों का जबरन बंध्याकरण कराया गया। उन्होंने सवाल किया कि केंद्र सरकार किस मुंह से कह रही है कि आदिवासियों की आबादी घट रही है? समाज अब इस षड्यंत्र को समझ चुका है और किसी भी कीमत पर अपनी संख्या बल को कम नहीं होने देगा। विधायक बाड़ा ने चेताया कि पुरखों की जमीन पर बसे शहरों से आज आदिवासी हाशिए पर धकेल दिए गए हैं। उन्होंने अपनों को आगाह करते हुए कहा कि चंद रुपयों के लालच में बाहरी तत्वों को जमीन बेचना बंद करें। साथ ही सरकार से मांग की कि शहरों में आदिवासियों के पुनर्वास, सुरक्षा और उनके जननायकों की प्रतिमाओं के सम्मान की पूरी गारंटी तय हो।

भूषण बाड़ा ने गैर-आदिवासियों द्वारा आदिवासी बेटियों से शादी कर जमीन और आरक्षण हथियाने के मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया गया। विधायक ने कहा कि यह फरेब अब बर्दाश्त नहीं होगा और ऐसे मामलों में आदिवासी दर्जा व आरक्षण का लाभ लेने पर तुरंत सख्त कानूनी रोक लगनी चाहिए। हमारे संवैधानिक अधिकार सिर्फ मूल वारिसों के लिए हैं। कागजी कानूनों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि जब जंगली जानवरों के लिए अभ्यारण्य बन सकते हैं, तो आदिवासियों की सुरक्षा के लिए आदिवासी स्वायत्त सुरक्षा अंचल क्यों नहीं? 5वीं अनुसूची को केवल फाइलों में रखने के बजाय जमीन पर ऐसा ठोस कानून लागू किया जाए, जिससे आदिवासी की एक इंच जमीन भी कोई गैर-आदिवासी न छीन सके।
‘सरना बनाम ईसाई’ का खेल बंद करने का आह्वान
समाज को बांटने की कोशिशों पर प्रहार करते हुए विधायक ने कहा कि ‘सरना बनाम ईसाई’ का विवाद खड़ा करके बाहरी ताकतें आदिवासियों को कमजोर करना चाहती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम सब की रगों में पुरखों का एक ही खून है। हम पहले आदिवासी और झारखंडी हैं। इसलिए एकजुट होकर ही अपने अस्तित्व को बचाना होगा। झारखंड के कोयला, लोहा, बॉक्साइट और यूरेनियम पर केंद्र के एकाधिकार की आलोचना करते हुए बाड़ा ने कहा कि हमें अपने ही घर में मजदूर बना दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत नीतियों के चलते छह महीने से केंद्र सरकार से मिलने वाले बुजुर्गों की पेंशन तक अटकी है, वहीं विस्थापन और बेरोजगारी के कारण युवाओं को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

हमारे अधिकारों पर डाका डालने की कोशिश हुई, तो होगा बड़ा उलगुलान
विधायक ने बिरसा मुंडा और सिदो-कान्हू के संघर्षों को याद दिलाते हुए मंच से अंतिम चेतावनी दी कि अगर परिसीमन की आड़ में राजनीतिक सीटें घटाने और अधिकारों पर डाका डालने की कोशिश हुई, तो झारखंड से उठी यह चिंगारी पूरे देश में बड़े जनांदोलन का रूप लेगी। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के जमाने की दमनकारी प्रशासनिक सीमाएं तोड़कर समाज को स्वाभाविक विस्तार मिलना चाहिए। जल, जंगल और जमीन से जुड़े इलाकों में बीडीओ, सीओ, एसपी और कलेक्टर आदिवासी समाज से ही तैनात किए जाएं। ताकि वे जनता के दर्द, संस्कृति और जमीन के महत्व को समझकर फैसले ले सकें।

झारखंड कोई खुली धर्मशाला नहीं है कि पड़ोसी राज्यों से दलाल और बिचौलिए आएं, हमारी जमीनों की लूट करें
झारखंड कोई खुली धर्मशाला नहीं है जहाँ छत्तीसगढ़, यूपी और अन्य पड़ोसी राज्यों से दलाल और बिचौलिए आएं, हमारी जमीनों की लूट करें और हम पर ही हुक्म चलाएं। वक्त आ गया है कि राज्य में एक सख्त स्थानीयता और ज़मीनी सत्यापन अभियान चले। ताकि फर्जी कागजातों के सहारे हमारी जमीनों पर कुंडली मारकर बैठे बाहरी तत्वों की पहचान कर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाए।

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