लगातार बारिश से उफनाईं स्वर्णरेखा-खरकई, खतरे के निशान के पार पहुंची खरकई

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Eksandeshlive Desk

पूर्वी सिंहभूम: पिछले दो दिनों से जारी मूसलधार बारिश के कारण जमशेदपुर की स्वर्णरेखा और खरकई नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार सुबह खरकई नदी आदित्यपुर पुल के समीप खतरे के निशान 129.00 मीटर को पार कर 129.12 मीटर पर पहुंच गई। वहीं, मानगो पुल के पास स्वर्णरेखा का जलस्तर 120.40 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 121.50 मीटर से महज 1.10 मीटर नीचे है। दोनों नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच निचले और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। लगातार बारिश के साथ चांडिल डैम, गालूडीह बराज और गांजिया बराज में पानी का दबाव बढ़ने के बाद इनके गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है। चांडिल डैम के जलस्तर में वृद्धि के बाद पहले आठ और बाद में नौ गेट खोले जाने की जानकारी सामने आई है। डैम का जलस्तर करीब 181 मीटर पहुंचने के बाद पानी की निकासी बढ़ाई गई। वहीं, गालूडीह बराज का जलस्तर 92 मीटर पहुंचने पर सात गेट खोले गए हैं। खरकई नदी पर बने गांजिया बराज के सभी पांच गेट खोल दिए गए हैं। जलाशयों और बराजों से पानी छोड़े जाने का असर आने वाले घंटों में नदियों के जलस्तर पर पड़ सकता है।

स्थिति को देखते हुए सुवर्णरेखा परियोजना के मुख्य अभियंता, फ्लड सेल की ओर से पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां के अलावा पश्चिम बंगाल तथा ओडिशा के आपदा प्रबंधन अधिकारियों को भी सतर्क किया गया है। फ्लड कंट्रोल सेल दोनों प्रमुख नदियों के जलस्तर और जल प्रवाह पर लगातार नजर रख रहा है। खरकई के खतरे के निशान को पार करने और स्वर्णरेखा के जलस्तर के तेजी से बढ़ने से बागबेड़ा, जुगसलाई, शास्त्रीनगर, कदमा, सोनारी, मानगो और सिदगोड़ा के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नदी किनारे बसे परिवारों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक रूप से नदी, घाट और जलभराव वाले क्षेत्रों में नहीं जाने तथा तेज बहाव वाले पानी को पार नहीं करने की अपील की है। इधर, मौसम विभाग के अनुसार 25 सितंबर की सुबह दक्षिण आंतरिक ओडिशा और उससे सटे दक्षिण छत्तीसगढ़ के ऊपर बना डीप डिप्रेशन कमजोर होकर डिप्रेशन में बदल गया है। यह सिस्टम उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है और अगले कुछ समय में इसके और कमजोर होने की संभावना है। इसके प्रभाव से झारखंड में बारिश का दौर जारी है। 25 सितंबर को भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवा की चेतावनी दी गई है, जबकि 26 और 27 सितंबर को भी कई इलाकों में गरज-चमक के साथ मौसम खराब रहने की संभावना है। ऐसे में लगातार बारिश, ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से पानी की आवक और डैमों से छोड़े जा रहे पानी के कारण अगले कुछ घंटे महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो स्वर्णरेखा और खरकई का जलस्तर और बढ़ सकता है। प्रशासन की ओर से निचले इलाकों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और लोगों से सतर्क रहने को कहा गया है।

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