Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली: गोवा में कांग्रेस के कार्यक्रम में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के केवल दो छंद गाए जाने पर उठे विवाद पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि स्वतंत्रता से पहले ही कांग्रेस ने तय कर दिया था कि राष्ट्रीय गीत क्या होगा। वही वंदे मातरम् महात्मा गांधी, पंडित नेहरू और सरदार पटेल ने भी गाया था। खरगे ने कहा कि सरकारों के हिसाब से राष्ट्रीय गीत नहीं बदला जा सकता। खरगे ने यहां पत्रकारों से कहा कि प्रधानमंत्री रहते हुए अटल बिहारी वाजपेयी और मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने भी यही वंदे मातरम् गाया था। उन्होंने कहा, “मैंने भी वही वंदे मातरम् गाया है। अगर यह गुनाह है तो गांधी जी, नेहरू जी और सरदार पटेल जी के ऊपर केस करो। अब जो प्रधानमंत्री-गृहमंत्री चाहेंगे, देश में वैसा ही थोड़े होता रहेगा। सरकारों के हिसाब से राष्ट्रीय गीत नहीं बदला जा सकता।”
कांग्रेस के कार्यक्रम में वंदे मातरम् के केवल शुरुआती दो अंतरे गाए गए: उल्लेखनीय है कि सोमवार को गोवा में कांग्रेस के कार्यक्रम में वंदे मातरम् के केवल शुरुआती दो अंतरे गाए गए। इस दौरान खरगे मंच पर मौजूद थे। जिसके बाद इसका विरोध शुरु हुआ है। इससे पहले स्वतंत्रता दिवस पर नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के गायन को लेकर भी विवाद हुआ था। उस समय राष्ट्रगीत के दो छंद बजने के बाद काग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी इससे असहज दिखी थीं और उन्होंने इसको लेकर हाथ हिलाते हुए बंद कराने जैसे आदेश भी दिए थे। इस दौरान राहुल गांधी और खरगे भी बातचीत करते देखे गए। हालांकि जब बाद में विवाद बढ़ा तो कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि सोनिया गांधी ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अधिक उम्र की वजह से बैठने के लिए कुर्सी देने को कहा था। इस मामले में सोनिया और राहुल गांधी के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि गीत के दौरान सोनिया ने कुछ इशारे किए जिन्हें आपत्ति के तौर पर देखा गया। शिकायत में प्रस्तावित ‘राष्ट्रीय सम्मान अपमान संशोधन विधेयक, 2026’ का हवाला दिया गया है, जिसमें राष्ट्रगान या राष्ट्रीय गीत के गायन में बाधा डालने पर तीन साल तक की जेल या जुर्माने का प्रावधान है। हाल ही में लोकसभा के मॉनसून सत्र के आखिरी दिन पहली बार पूरे ‘वंदे मातरम्’ के छह छंद गाए गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी और सभी सांसद मौजूद थे। यह कदम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा राष्ट्रगीत को कानूनी सुरक्षा देने वाले कानून को मंजूरी देने के कुछ दिनों बाद उठाया गया था।
सोशल मीडिया सेंसरशिप लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने अभूतपूर्व तरीके से भारतीय नागरिकों के बोलने, सवाल पूछने और असहमति जताने के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला किया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर लागू की गई सेंसरशिप उतनी ही निंदनीय है जितनी युवाओं पर की गई लाठीचार्ज और पैलेट गन का इस्तेमाल। मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को एक अंग्रेजी अखबार के पोस्ट को एक्स पर साझा करते हुए कहा कि मार्च से जुलाई 2026 के बीच सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को हर 68 सेकेंड में एक ब्लॉकिंग आदेश भेजा। इस दौरान कुल 1.95 लाख आदेश जारी किए गए। इनमें से 1 लाख आदेश इंस्टाग्राम पर, 80 हजार फेसबुक पर और 15 हजार यूट्यूब पर भेजे गए। इंस्टाग्राम छात्रों और युवाओं के विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख मंच रहा। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह कार्रवाई अपराधियों के खिलाफ नहीं बल्कि उन छात्रों और युवाओं के खिलाफ थी जो सड़कों पर अपने भविष्य और परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जब युवाओं की हड्डियां तोड़ी जा रही थीं, उसी समय उनकी आवाजें इंटरनेट से पोस्ट दर पोस्ट और रील दर रील मिटाई जा रही थीं। खरगे ने कहा कि आज कोई भी पत्रकार, क्रिएटर या आम नागरिक अगर सरकार की आलोचना करता है तो उसे तुरंत पोस्ट हटाने, एफआईआर की धमकी और ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सोशल मीडिया पर सामग्री हटाने का समय घटाकर 3 घंटे कर दिया है और सेंसरशिप को इतना ऑटोमेटेड कर दिया है कि किसी आदेश को लागू करने से पहले कोई मानव समीक्षा तक नहीं होती।
