नेपाल बाढ़ त्रासदी: मृतकों की संख्या 1,355 पहुंची, करीब 5,000 लोग अब भी लापता

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Eksandeshlive Desk

काठमांडू: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या 1,355 पहुंच गई है। अभी भी जारी खोज, बचाव और राहत अभियान के बीच करीब 5,000 लोग अब भी लापता या लापता बताए जा रहे हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार बरामद अवशेषों में मानव शरीर के विभिन्न अंग भी शामिल हैं। अब तक 98 शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। प्राधिकरण की प्रवक्ता शांति महत ने बताया कि रसुवा से 169, नुवाकोट से 197, धादिङ से 70, गोरखा से 75, तनहूं से 38, चितवन से 363, नवलपरासी पूर्व से 222 और नवलपरासी पश्चिम से 221 शव बरामद किए गए हैं। उन्होंने बताया कि बाढ़ के बाद करीब 4,996 लोगों के लापता होने या उनका पता नहीं चल पाने की सूचना है। नवीनतम रिकॉर्ड के अनुसार एक प्रभावित क्षेत्र में करीब 1,967 लापता लोगों और नुवाकोट में करीब 2,340 लोगों का विवरण अपडेट किया गया है। प्राधिकरण के अनुसार लापता लोगों में करीब 100 सुरक्षाकर्मी और सरकारी कर्मचारी तथा लगभग 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इस बीच, बाढ़ के कारण फंसे 13,396 लोगों को अब तक सुरक्षित बचाया जा चुका है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार बाढ़ में घायल 6,672 लोगों का इलाज कराया गया है। इनमें से 323 लोग अभी भी विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन हैं, जबकि 228 लोगों को अस्पताल से छुट्टी देकर घर भेज दिया गया है। वर्तमान में बाढ़ प्रभावित 3,533 लोग 39 होल्डिंग सेंटरों में रह रहे हैं। प्राधिकरण के अनुसार इनमें 669 लोग रसुवा, 2,651 नुवाकोट और 213 लोग धादिङ में हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में खोज एवं बचाव, राहत वितरण और सुरक्षा व्यवस्था के लिए कुल 21,402 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। इनमें 9,287 नेपाली सेना, 7,912 नेपाल पुलिस और 4,203 सशस्त्र पुलिस बल के जवान शामिल हैं।

नेपाल में बाढ़ के बाद सुरंगों में फंसे लोगों का बचाव अभियान बना जटिल: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद सुरंगों के भीतर फंसे लोगों को बचाने का अभियान लगातार जटिल होता जा रहा है। अलग-अलग स्थानों पर एक साथ कई संभावित बचाव अभियान चलाने पड़ रहे हैं, जिनमें अलग-अलग जोखिम, अनिश्चितताएं और चुनौतियां मौजूद हैं। बचाव अभियान का नेतृत्व कर रहे 62 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई सुरंग विशेषज्ञ और भूविज्ञानी प्रोफेसर अर्नोल्ड डिक्स ने कहा कि नेपाल इस समय एक असाधारण स्थिति का सामना कर रहा है, जहां कई संभावित बचाव अभियान एक साथ सामने हैं। भारत के उत्तराखंड में वर्ष 2023 में सिल्क्यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों के सफल बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल करने वाले डिक्स ने नेपाल की मौजूदा स्थिति को अपने जीवन की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक बताया। सोमवार को सोशल मीडिया पर सिल्क्यारा बचाव अभियान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 41 श्रमिकों का सफल बचाव इस बात का प्रमाण था कि सामूहिक प्रयास से असंभव जैसी दिखने वाली चुनौतियों को भी पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एक बड़ी चुनौती को पार कर लेना जरूरी नहीं कि सभी परीक्षाएं खत्म हो गई हों। इसके बजाय इससे और बड़ी जिम्मेदारियां सामने आ सकती हैं।पश्चिमी अवधारणा में कर्तव्य और पूर्वी दर्शन में धर्म के बीच समानता बताते हुए डिक्स ने कहा कि बचाव अभियान में प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि सफलता की संभावना कितनी भी अनिश्चित क्यों न हो, सही काम करना जारी रखा जाए। उन्होंने कहा कि सिल्क्यारा बचाव अभियान ने उन्हें यह सीख दी कि किसी चीज के मुश्किल या असंभव जैसी दिखने को वास्तव में असंभव नहीं समझना चाहिए। वहीं, नेपाल की मौजूदा स्थिति उन्हें एक और महत्वपूर्ण सबक सिखा रही है—जब एक ही समय में कई लोगों की जिंदगी बचाव दलों पर निर्भर हो सकती है, तो उम्मीद को अनुशासित कार्रवाई में और संवेदना को व्यावहारिक सहायता में बदलना जरूरी है। डिक्स के अनुसार किसी बचाव अभियान की असली परीक्षा केवल इस बात से नहीं होती कि कितनी जानें बचाई गईं, बल्कि इस बात से होती है कि परिस्थितियां कठिन होने, जिम्मेदारियां बढ़ने और परिणाम अनिश्चित रहने के बावजूद बचाव दल अपने प्रयास जारी रखते हैं या नहीं। डिक्स ने जोर देकर कहा कि किसी बचाव अभियान की सफलता का आकलन केवल बचाई गई जिंदगियों की संख्या से नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने उन लोगों की तलाश और सहायता जारी रखने की जिम्मेदारी पर जोर दिया, जो अभी भी जीवित हो सकते हैं। उनके संदेश ने पूर्वी नेपाल में आए 6.9 तीव्रता के भूकंप के दौरान बचाव अभियानों का अनुभव करने वाले लोगों की पुरानी यादें भी ताजा कर दी हैं। कुछ लोगों ने कहा कि डिक्स के विचारों ने उन्हें पिछली आपदाओं की याद दिलाने के साथ-साथ मौजूदा संकट के बीच नई उम्मीद भी जगाई है। भोटेकोशी से प्रभावित क्षेत्रों में नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और विशेषज्ञ बचाव दल लगातार तैनात हैं। टीमें सुरंगों के भीतर फंसे होने की आशंका वाले लोगों का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास जारी रखे हुए हैं।

बाढ़ प्रभावित नेपाल को अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने को अमेरिका तैयारः मार्को रुबियो: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को नेपाल की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (आरएसपी) के अध्यक्ष रवि लामिछाने से टेलीफोन पर बात की और विनाशकारी बाढ़ में हुई जानमाल की क्षति के लिए सांत्वना देते हुए नेपाल सरकार के प्रति एकजुटता जताई। रुबियो ने कहा कि अमेरिका विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित नेपाल को अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। आरएसपी के अनुसार रुबियो ने बाढ़ में जान गंवाने वालों के प्रति शोक व्यक्त किया और इस कठिन समय में नेपाली जनता तथा नेपाल सरकार के प्रति एकजुटता जताई। रुबियो ने कहा कि अमेरिका नेपाल को अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। बातचीत के दौरान लामिछाने ने कहा कि उनकी पार्टी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सरकार द्वारा जारी खोज, बचाव और राहत कार्यों में सहयोग के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने रुबियो को आश्वस्त किया कि हाल की बाढ़ से प्रभावित विदेशी नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए नेपाल प्रतिबद्ध है। लामिछाने ने आपदा के दौरान सहायता एवं सहयोग प्रदान करने के लिए अमेरिकी सरकार का आभार जताया।

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