ओवरलोड सवारी वाहनों में सफर करने को मजबूर ग्रामीण, विद्यार्थियों से लेकर बुजुर्गों तक की बढ़ी परेशानी
AMIT RANJAN
जलडेगा: जलडेगा प्रखंड क्षेत्र में पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन सुविधा नहीं होने के कारण ओड़गा और आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों को रोजाना जोखिम भरा सफर करना पड़ रहा है। ओड़गा से परबा, जुनाडीह, बोंगरा और लमडेगा होते हुए जलडेगा प्रखंड मुख्यालय तक चलने वाली सवारी गाड़ियों में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाना आम बात हो गई है। सीटें भरने के बाद भी यात्रियों को खड़े होकर और कई बार वाहनों के पायदान पर लटककर सफर करना पड़ता है।
सवारी वाहनों में लगातार बढ़ती भीड़ से किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि बाजार, सरकारी कार्यालय, अस्पताल और अन्य जरूरी कार्यों के लिए जलडेगा पहुंचना उनकी मजबूरी है। पर्याप्त वाहन नहीं मिलने के कारण लोग उपलब्ध सवारी गाड़ियों में किसी तरह सफर करने को विवश हैं।
रोजाना सैकड़ों ग्रामीण करते हैं आवागमन
ओड़गा और आसपास के गांवों से प्रतिदिन सैकड़ों लोग विभिन्न कार्यों से जलडेगा प्रखंड मुख्यालय पहुंचते हैं। विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज, ग्रामीणों को बाजार एवं सरकारी कार्यालयों तथा मरीजों को इलाज के लिए जलडेगा आना-जाना पड़ता है। सुबह और शाम के समय यात्रियों की संख्या बढ़ जाने से वाहनों में अत्यधिक भीड़ हो जाती है।
विद्यार्थियों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी
पर्याप्त परिवहन साधन नहीं होने का सबसे अधिक असर विद्यार्थियों, महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। समय पर वाहन नहीं मिलने से विद्यार्थियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। वाहन मिलने पर भी भीड़ के कारण उन्हें असुविधाजनक और जोखिम भरे तरीके से सफर करना पड़ता है। बुजुर्गों और महिलाओं के लिए लंबी दूरी तक खड़े होकर यात्रा करना विशेष रूप से परेशानी का कारण बन रहा है।
हादसे के बाद नहीं, पहले हो व्यवस्था
ग्रामीणों ने जिला एवं प्रखंड प्रशासन से ओड़गा–जलडेगा मार्ग पर नियमित सरकारी अथवा निजी बस सेवा शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बस सेवा शुरू होने से सवारी वाहनों पर दबाव कम होगा और यात्रियों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक परिवहन मिल सकेगा।
ग्रामीणों ने क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने वाले वाहनों पर कार्रवाई, नियमित जांच और ओवरलोडिंग पर प्रभावी रोक लगाने की भी मांग की है। साथ ही प्रशासन से पूरे मार्ग का सर्वे कर यात्रियों की संख्या के अनुरूप पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था करने की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय समय रहते परिवहन व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस पहल करनी चाहिए, ताकि रोजाना जोखिम उठाकर सफर करने को मजबूर लोगों को राहत मिल सके।
