ममता पहले ही रूठ चुकी थी, अब पिता का साया भी छिना

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News by Mustaffa

मंदबुद्धि बच्ची को घर से बाहर निकाला और फंदे से झूल गया मलू

​मेसरा (रांची): कहते हैं गरीबी इंसान को तोड़ती है,लेकिन अपनों का धोखा उसे भीतर से खत्म कर देता है। बीआईटी मेसरा ओपी क्षेत्र के होम्बई गांव में रविवार को एक रिक्शा चालक की जिंदगी का सफर बेहद दर्दनाक मोड़ पर खत्म हुआ। नगड़ी थाना क्षेत्र के ललगुटूवा निवासी 35 वर्षीय मलू लोहरा ने अपनी पत्नी के बिछड़ जाने के गम और मानसिक तनाव के आगे हार मानकर खुदकुशी कर ली। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। रविवार को जब मलू ने मौत को गले लगाने का खौफनाक फैसला किया,उस वक्त घर में उसके मौसा ससुर की एक छोटी बच्ची थी,जो मानसिक रूप से कमजोर है। मलू ने उस मासूम बच्ची को बहलाया और उसे धक्का देकर घर से बाहर निकाल दिया। वह अबोध बच्ची कुछ समझ नहीं पाई और बाहर खड़ी रही। इसके बाद मलू ने अंदर से दरवाजा बंद कर फंदे के सहारे अपनी जान दे दी। मृतक पेशे से रिक्शा चालक था और हाड़-तोड़ मेहनत कर अपने दो बच्चों की परवरिश कर रहा था। परिजनों के अनुसार,चार महीने पहले उसकी दुनिया तब उजड़ गई जब उसकी पत्नी उसे और बच्चों को अकेला छोड़कर किसी और के साथ चली गई। इस विश्वासघात के बाद से मलू गुमसुम रहने लगा था। वह अपने बच्चों के लिए जीने की कोशिश तो कर रहा था,लेकिन पत्नी की बेवफाई का घाव गहरा होता गया। वह होम्बई गांव स्थित अपने स्वर्गीय मौसा ससुर शिव चरण लोहरा के घर आया हुआ था,जहाँ उसने यह आत्मघाती कदम उठाया। घटना की जानकारी मिलते ही बीआईटी मेसरा ओपी पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को फंदे से उतारा। थाना प्रभारी अजय कुमार दास ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह खुदकुशी का मामला है। मृतक अपनी पत्नी के छोड़कर चले जाने के बाद से भारी मानसिक दबाव में था। पुलिस ने परिजनों को सूचित कर बुलाया और शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया। मृतक मलू की मौत के बाद अब उन दो मासूम बच्चों के सिर से छत छीन गई है। माँ पहले ही ममता का आंचल समेट कर जा चुकी थी और अब पिता भी मानसिक तनाव की जंग हार गया। चर्चा है कि यदि समय रहते मलू को उचित परामर्श या सामाजिक सहारा मिलता,तो आज बच्चे अनाथ न होते।

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