Eksandeshlive Desk
रांची: नामकुम अंचल में जमीन की खरीद-बिक्री, दाखिलखारिज में कथित गड़बड़ी और राजस्व दस्तावेजों के गायब होने के मामले में उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने कार्रवाई की है। एसीबी ने नामकुम अंचल की तत्कालीन अंचल अधिकारी (सीओ) श्वेता वर्मा समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। प्राथमिकी में तत्कालीन सीओ श्वेता वर्मा के अलावा तत्कालीन सीआई मनोज कुमार और दीपक कुमार को आरोपी बनाया गया है। एसीबी की ओर से शुक्रवार को शपथ पत्र के माध्यम से झारखंड उच्च न्यायालय को प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत में हुई। एसीबी का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने इस मामले से संबंधित अवमानना याचिका को ड्रॉप कर दिया।
एसीबी की ओर से वरिष्ठ स्थायी अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने पक्ष रखा। वहीं प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता जेजे सांगा ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा। मामले की पिछली सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने नामकुम अंचल में जमीन की खरीद-बिक्री और राजस्व दस्तावेजों के गायब होने से जुड़े मामले में एसीबी को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू करने का निर्देश दिया था। अदालत ने नामकुम अंचल के उन अधिकारियों के संबंध में भी सीलबंद रिपोर्ट मांगी थी, जिनकी भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध या दोषपूर्ण पाई गई थी। अदालत के निर्देश के बाद एसीबी ने मामले की जांच करते हुए तीन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की और शुक्रवार को इसकी जानकारी अदालत को दी। यह मामला नामकुम अंचल कार्यालय में राजस्व दस्तावेजों के गायब होने और दाखिलखारिज (म्यूटेशन) की प्रक्रिया में कथित अनियमितता से जुड़ा है। प्रार्थी थॉमस साइमन ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि नामकुम अंचल कार्यालय में दाखिलखारिज के एक मामले में गड़बड़ी की गई है।याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि मामले की जांच के लिए मांगे जाने के बावजूद मूल राजस्व अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जा रहे थे। विवादित भूमि नामकुम अंचल के डुंडु क्षेत्र में स्थित है।
पूर्व की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य भी सामने आया था कि अंचल कार्यालय दूसरे पक्षकार के पक्ष में किए गए दाखिलखारिज की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने में लगातार टालमटोल कर रहा था। प्रार्थी के पक्ष में उच्च न्यायालय की ओर से पहले स्पष्ट आदेश जारी किए जाने के बावजूद अंचल अधिकारियों द्वारा उसका अनुपालन नहीं किए जाने की बात भी सामने आई थी। अदालत ने प्रथम दृष्टया सरकारी रिकॉर्ड से संबंधित इस कथित अनियमितता को गंभीर मामला माना था। इसके बाद पूरे प्रकरण की जांच की जिम्मेदारी एसीबी को सौंपी गई। अब तीन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच आगे बढ़ेगी और दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी, दाखिलखारिज की प्रक्रिया तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत पड़ताल की जाएगी।
