ब्रिटिश शासनकाल से संचालित चतरा हेड पोस्ट ऑफिस बदहाली का शिकार
अशोक अनन्त
चतरा : ब्रिटिश शासनकाल से संचालित चतरा जिले का मुख्य डाकघर यानी हेड पोस्ट ऑफिस आज अपनी बदहाली पर खुद आंसू बहाता नजर आ रहा है। कभी जिले की डाक व्यवस्था की पहचान रहा यह प्रमुख डाकघर वर्तमान समय में मूलभूत सुविधाओं के अभाव और जर्जर व्यवस्था से जूझ रहा है। यहां आने वाले ग्राहकों को जहां कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, वहीं डाकघर में कार्यरत कर्मचारियों के लिए भी पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब जिले का मुख्य डाकघर ही बदहाल है तो ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में संचालित डाकघरों की स्थिति कैसी होगी ? चतरा जिला करीब 3706 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है और इसकी आबादी 11 लाख से अधिक है। इतनी बड़ी आबादी को डाक, बैंकिंग, बचत, बीमा और अन्य डाक सेवाएं उपलब्ध कराने वाले जिले के मुख्य डाकघर की मौजूदा स्थिति विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है। एक ओर शासन-प्रशासन की ओर से जिले में लगातार आधारभूत संरचनाओं के विकास और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर शहर के महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों में से एक हेड पोस्ट ऑफिस अपनी बदहाल स्थिति से व्यवस्था को आईना दिखाता नजर आ रहा है।
जर्जर भवन में चल रहा कामकाज
मुख्य डाकघर की हालत देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि लंबे समय से भवन के रख-रखाव और आवश्यक मरम्मत पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया है। भवन के विभिन्न हिस्सों में जर्जरता साफ दिखाई देती है। पुराने ढांचे में ही कर्मचारियों को रोजाना काम करना पड़ रहा है और ग्राहकों को भी इसी परिसर में अपनी जरूरत की डाक सेवाओं के लिए पहुंचना पड़ता है। समय के साथ डाक विभाग की सेवाओं का स्वरूप काफी बदल गया है। अब डाकघर महज चिट्ठी-पत्री भेजने तक सीमित नहीं हैं। बचत खाता, डाक जीवन बीमा, पार्सल, स्पीड पोस्ट, आधार से जुड़ी सेवाएं, विभिन्न वित्तीय सेवाएं और कई अन्य सुविधाओं के कारण डाकघरों में लोगों की आवाजाही बनी रहती है। इसके बावजूद चतरा के मुख्य डाकघर में आधुनिक ग्राहक सुविधाओं के अनुरूप आधारभूत व्यवस्था विकसित नहीं हो पाना चिंता का विषय है।
ग्राहकों को होती है परेशानी
डाकघर में रोजाना बड़ी संख्या में लोग अपने काम के लिए पहुंचते हैं। बुजुर्ग, महिलाएं, पेंशनधारी, व्यापारी, विद्यार्थी और ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले लोग भी डाकघर की सेवाओं पर निर्भर हैं। ऐसे में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, स्वच्छ वातावरण, पेयजल, साफ-सफाई और अन्य जरूरी सुविधाओं का होना बेहद आवश्यक है। ग्राहकों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों को आधुनिक स्वरूप देने की बातें तो लगातार होती हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति अलग नजर आती है। जिस भवन में जिले के हजारों लोगों का कामकाज होता है, वहां यदि मूलभूत सुविधाएं ही पर्याप्त नहीं हों तो आम लोगों की परेशानी का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
कर्मचारियों के लिए भी चुनौतीपूर्ण हालात
सिर्फ ग्राहक ही नहीं, बल्कि डाकघर के कर्मचारी भी मौजूदा व्यवस्था से प्रभावित होते हैं। सीमित और पुरानी आधारभूत संरचना के बीच रोजाना काम करना कर्मचारियों के लिए भी चुनौतीपूर्ण है। कार्यालय में बेहतर कार्य वातावरण के लिए आवश्यक सुविधाओं और संसाधनों का होना जरूरी है, ताकि कर्मचारियों को सुचारू रूप से काम करने में परेशानी न हो। डाक विभाग देश के सबसे पुराने और व्यापक सरकारी सेवा नेटवर्क में शामिल है। ऐसे में उसके प्रमुख कार्यालय का बेहतर और आधुनिक होना न केवल कर्मचारियों बल्कि आम नागरिकों के हित में भी आवश्यक है।
विकास के दावों को मुंह चिढ़ा रहा डाकघर
चतरा जिले में विकास को लेकर समय-समय पर बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं। नई सड़कें, भवन, परियोजनाएं और आधारभूत संरचनाओं के विस्तार की बातें सामने आती रहती हैं। लेकिन शहर के बीचोंबीच स्थित जिले के मुख्य डाकघर की जर्जर स्थिति इन दावों को ही मुंह चिढ़ाती नजर आती है। सवाल यह भी है कि जब जिले के सबसे महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों में शामिल हेड पोस्ट ऑफिस की दशा सुधारने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है, तो आम नागरिकों के लिए आधुनिक और सुविधाजनक सरकारी सेवाओं का सपना कितना साकार हो पाएगा ?
संरक्षण और आधुनिकीकरण की जरूरत
ब्रिटिश शासनकाल से संचालित होने के कारण चतरा हेड पोस्ट ऑफिस का ऐतिहासिक महत्व भी है। ऐसे पुराने संस्थानों को केवल सरकारी कार्यालय के रूप में नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक विरासत के हिस्से के तौर पर भी देखा जाना चाहिए। भवन की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इसके संरक्षण, आवश्यक मरम्मत और आधुनिकीकरण की दिशा में गंभीर पहल की जरूरत है। स्थानीय लोगों की मांग है कि डाक विभाग के वरीय अधिकारी चतरा हेड पोस्ट ऑफिस की स्थिति का निरीक्षण करें और भवन की तकनीकी जांच कराकर आवश्यक मरम्मत अथवा नए भवन के निर्माण की दिशा में ठोस पहल करें। साथ ही ग्राहकों के लिए बेहतर बैठने की व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई, शौचालय तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
कब बदलेगी तस्वीर
चतरा के मुख्य डाकघर की मौजूदा स्थिति को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इसकी तस्वीर कब बदलेगी ? जिले की बड़ी आबादी आज भी डाक विभाग की विभिन्न सेवाओं का इस्तेमाल करती है। ऐसे में मुख्य डाकघर का जर्जर और अव्यवस्थित रहना केवल एक भवन की समस्या नहीं, बल्कि सरकारी सेवा व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं से जुड़ा गंभीर विषय है। जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग और शासन-प्रशासन इस ओर गंभीरता से ध्यान दें और केवल कागजों पर विकास के दावों के बजाय धरातल पर भी ऐसी तस्वीर पेश करें, जिससे आम लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। चतरा का ऐतिहासिक हेड पोस्ट ऑफिस भी अब इसी बदलाव का इंतजार कर रहा है।
2009 में हुआ था डाकघर का नवीनीकरण, 17 साल में फिर बदहाल हुई व्यवस्था
चतरा मुख्य डाकघर की मौजूदा बदहाल स्थिति और भी गंभीर इसलिए नजर आती है, क्योंकि इसका नवीनीकरण करीब 17 वर्ष पूर्व प्रोजेक्ट ऐरो के तहत किया गया था। भारत सरकार के संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, डाक विभाग के तत्वावधान में डाक सेवाएं झारखंड सर्किल की तत्कालीन निदेशक शशि शालिनी कुजूर द्वारा प्रोजेक्ट ऐरो के अंतर्गत नवीनीकृत चतरा मुख्य डाकघर का लोकार्पण 15 सितंबर 2009 को किया गया था। प्रोजेक्ट ऐरो का उद्देश्य डाकघरों को आधुनिक स्वरूप प्रदान करते हुए ग्राहकों को बेहतर एवं सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराना था। इसी उद्देश्य के तहत चतरा मुख्य डाकघर का भी नवीनीकरण कराया गया था। लेकिन समय बीतने के साथ भवन और व्यवस्था की स्थिति दोबारा बदहाल होती चली गई। वर्ष 2009 में जिस डाकघर को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर बेहतर सेवा व्यवस्था की उम्मीद के साथ नया स्वरूप दिया गया था, आज वही डाकघर रख-रखाव के अभाव और आधारभूत सुविधाओं की कमी से जूझता नजर आ रहा है। इससे यह सवाल उठना लाजिमी है कि नवीनीकरण के बाद नियमित रख-रखाव और मरम्मत की व्यवस्था आखिर कितनी प्रभावी रही ?
